तीज 2025 व्रत में इन्हीं गलतियों से बचना है ज़रूरी – नहीं तो फीका पड़ जाएगा भाग्य

भारत में व्रत और त्योहार केवल धार्मिक परंपरा ही नहीं बल्कि भावनाओं, विश्वास और आस्था का गहरा प्रतीक होते हैं। खासकर हरितालिका तीज का व्रत, जो सुहागिन महिलाओं और नवविवाहित कन्याओं के लिए अत्यंत महत्व रखता है। यह व्रत न केवल पति की लंबी आयु और वैवाहिक सुख-समृद्धि के लिए किया जाता है, बल्कि इसे करने से मन को शक्ति और आत्मा को शांति भी मिलती है।https://youtu.be/YwuqXG-Cc5M?si=ZDEzKXc5woQDV7o0
लेकिन अक्सर लोग व्रत करते समय कुछ अनजाने में गलतियाँ कर बैठते हैं। ये गलतियाँ भले ही छोटी लगें, लेकिन इनसे व्रत का पूरा फल प्रभावित हो सकता है और भाग्य भी फीका पड़ सकता है। आज हम इस लेख में विस्तार से जानेंगे कि तीज व्रत करते समय किन गलतियों से बचना सबसे अधिक आवश्यक है।
तीज व्रत का महत्व
हरितालिका तीज का व्रत सुहागिन महिलाओं और अविवाहित कन्याओं दोनों के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उसी तपस्या की याद में यह व्रत रखा जाता है।
जो भी स्त्री पूरे विधि-विधान और श्रद्धा से यह व्रत करती है, उसके जीवन में –
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पति का स्वास्थ्य और दीर्घायु बनी रहती है।
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वैवाहिक जीवन में सुख और समृद्धि आती है।
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मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
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अविवाहित कन्याओं को योग्य वर की प्राप्ति होती है।
लेकिन इन सभी फलों को पाने के लिए ज़रूरी है कि व्रत पूरी निष्ठा, शुद्धता और सावधानी से किया जाए।
तीज व्रत में होने वाली आम गलतियाँ और उनसे बचने के उपाय
1. व्रत की सही तिथि या मुहूर्त न जानना
अक्सर महिलाएँ केवल परंपरा से सुनकर व्रत रख लेती हैं, लेकिन सही तिथि और मुहूर्त का पता नहीं लगातीं।
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क्यों यह गलती है?
गलत तिथि पर किया गया व्रत शास्त्रों में मान्य नहीं माना जाता। इससे पुण्य घट सकता है। -
कैसे बचें?
पंचांग, पंडित या विश्वसनीय धार्मिक स्रोत से सही तिथि और पूजा का समय अवश्य जान लें।
2. व्रत में मन अशांत रखना
व्रत का मूल आधार है श्रद्धा और भक्ति। यदि मन में क्रोध, तनाव, झगड़ा या नकारात्मक भाव हैं तो व्रत का फल अधूरा रह जाता है।
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उपाय
व्रत के दिन मन को शांत रखें। झगड़े से बचें, प्रेमपूर्वक और नम्रता से बात करें। मंत्र जाप और भजन करने से मन की शांति बनी रहती है।
3. पूजा-सामग्री अधूरी रखना
कई बार महिलाएँ जल्दीबाजी में पूजा-सामग्री अधूरी रख लेती हैं या कोई वस्तु भूल जाती हैं।
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क्यों यह गलती है?
अधूरी पूजा से माता पार्वती प्रसन्न नहीं होतीं और पूजा का फल कम हो सकता है। -
कैसे बचें?
व्रत से एक दिन पहले ही पूरी सामग्री (कुमकुम, रोली, मेहंदी, सुहाग का सामान, फल, फूल, दीपक आदि) एकत्र कर लें।
4. केवल बाहरी दिखावे पर ध्यान देना
कुछ लोग तीज को केवल सजने-संवरने या सोशल मीडिया पर फोटो डालने तक सीमित कर देते हैं।
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क्यों यह गलती है?
तीज का व्रत केवल श्रृंगार या दिखावे के लिए नहीं, बल्कि आस्था और समर्पण का प्रतीक है। -
उपाय
श्रृंगार ज़रूर करें क्योंकि यह सुहाग का प्रतीक है, लेकिन पूजा और भक्ति को प्राथमिकता दें।
5. जल और अन्न ग्रहण करना
हरितालिका तीज का व्रत निर्जला माना गया है। कई महिलाएँ कठिनाई या लापरवाही के कारण पानी या भोजन ले लेती हैं।
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क्यों यह गलती है?
यह व्रत कठिन तपस्या का प्रतीक है। यदि संभव हो तो नियम न तोड़ें। -
कैसे बचें?
यदि स्वास्थ्य अनुमति न दे तो व्रत करने से पहले ही संकल्प लें और पंडित से पूछकर फलाहार का नियम अपना लें। लेकिन व्रत को हल्के में न लें।
6. दूसरों की निंदा करना
व्रत के दिन विशेष रूप से शुद्ध वाणी और विचार रखना चाहिए।
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क्यों यह गलती है?
दूसरों की निंदा, चुगली या कटु वचन व्रत की शक्ति को कम करते हैं। -
कैसे बचें?
दिनभर सकारात्मक बातें करें। किसी की बुराई के बजाय भगवान शिव-पार्वती की महिमा का गुणगान करें।
7. पूजा में मन न लगाना
कई बार थकान या औपचारिकता के कारण महिलाएँ केवल पूजा की रस्में पूरी कर देती हैं, मन से नहीं करतीं।
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क्यों यह गलती है?
भक्ति भाव के बिना पूजा अधूरी होती है। -
कैसे बचें?
भले ही कम समय हो, लेकिन पूरे मन से शिव-पार्वती का ध्यान करें और प्रार्थना करें।
8. बुज़ुर्गों और सास-ससुर का आशीर्वाद न लेना
व्रत का उद्देश्य केवल पति की दीर्घायु नहीं बल्कि पूरे परिवार का कल्याण है।
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क्यों यह गलती है?
बुज़ुर्गों के आशीर्वाद के बिना कोई भी पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती। -
कैसे बचें?
पूजा के बाद सास-ससुर और परिवार के बड़े-बुज़ुर्गों का आशीर्वाद ज़रूर लें।
9. व्रत को बोझ समझना
कई बार महिलाएँ सोचती हैं कि यह व्रत केवल कठिनाई और परेशानी है।
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क्यों यह गलती है?
आस्था के बिना किया गया व्रत केवल शरीर पर बोझ बन जाता है। -
कैसे बचें?
व्रत को कर्तव्य या दबाव नहीं, बल्कि भगवान शिव-पार्वती से जुड़ने का अवसर मानें।
10. दान-पुण्य भूल जाना
व्रत केवल अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों के कल्याण के लिए भी किया जाता है।
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क्यों यह गलती है?
बिना दान-पुण्य के व्रत अधूरा माना जाता है। -
कैसे बचें?
व्रत के दिन किसी गरीब, ज़रूरतमंद या कन्या को वस्त्र, भोजन या पैसे का दान ज़रूर करें।
तीज व्रत करने का सही तरीका (संक्षेप में)
तीज 2025 व्रत में इन्हीं गलतियों से बचना है ज़रूरी – नहीं तो फीका पड़ जाएगा भाग्य
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सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
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माता पार्वती और भगवान शिव की मूर्ति या चित्र को सजाएँ।
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सुहाग का सामान (मेहंदी, चूड़ी, सिंदूर, बिंदी आदि) अर्पित करें।
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निर्जला व्रत का संकल्प लें।
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पूरे दिन भजन-कीर्तन करें, झगड़े और नकारात्मकता से दूर रहें।
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रात में शिव-पार्वती की कथा सुनें और आरती करें।
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अगले दिन व्रत का समापन करें और दान-पुण्य करें।
FAQ
Q1. तीज व्रत का महत्व क्या है?
👉 तीज व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए किया जाता है। मान्यता है कि इससे पति की लंबी आयु, दांपत्य सुख और जीवन में समृद्धि मिलती है।
Q2. तीज व्रत में किन गलतियों से बचना चाहिए?
👉 अधूरी पूजा-सामग्री रखना, व्रत का नियम तोड़ना, झगड़ा या नकारात्मक सोच रखना और बुज़ुर्गों का आशीर्वाद न लेना सबसे बड़ी गलतियाँ मानी जाती हैं।
Q3. क्या तीज व्रत निर्जला रखना ज़रूरी है?
👉 हाँ, परंपरा के अनुसार तीज व्रत निर्जला रखा जाता है। लेकिन यदि स्वास्थ्य अनुमति न दे तो पंडित से पूछकर फलाहार किया जा सकता है।
Q4. तीज व्रत की पूजा कैसे करनी चाहिए?
👉 सुबह स्नान कर माता पार्वती-शिव जी की मूर्ति सजाएँ, सुहाग का सामान अर्पित करें, कथा सुनें, आरती करें और अगले दिन व्रत का समापन कर दान करें।
Q5. क्या अविवाहित कन्याएँ भी तीज व्रत कर सकती हैं?
👉 जी हाँ, अविवाहित कन्याएँ योग्य वर की प्राप्ति के लिए तीज व्रत रख सकती हैं।
निष्कर्ष
तीज व्रत केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि स्त्री की आस्था, विश्वास और शक्ति का प्रतीक है। यह व्रत हमें न केवल वैवाहिक जीवन की खुशियाँ देता है बल्कि मन को भी शांति और आत्मविश्वास से भर देता है।
लेकिन याद रखें – यदि इस व्रत के दौरान उपरोक्त गलतियाँ की जाएँ तो व्रत का पूरा फल नहीं मिलता और भाग्य का प्रभाव फीका पड़ जाता है। इसलिए तीज व्रत करते समय हर छोटी-बड़ी बात का ध्यान रखें, तभी आप इसका सच्चा और दिव्य फल प्राप्त कर पाएँगी।
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