लंदन में चोरी हुए 80,000 से ज़्यादा iPhones! पुलिस ने Apple पर लगाया बड़ा आरोप

लंदन में चोरी हुए 80,000 से ज़्यादा iPhones! पुलिस ने Apple पर लगाया बड़ा आरोप

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लंदन शहर में मोबाइल चोरी की घटनाएँ इस समय “महामारी” जैसी बन चुकी हैं। ब्रिटेन की Metropolitan Police Service (Met Police) ने अब सीधा आरोप लगाया है कि Apple कंपनी इस बढ़ती चोरी में अप्रत्यक्ष रूप से मदद कर रही है, क्योंकि वह चोरी हुए iPhones की जानकारी वाली राष्ट्रीय डेटाबेस (NMPR) को नज़रअंदाज़ कर रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने सांसदों (MPs) को बताया है कि Apple के पास NMPR डेटाबेस की पहुँच है और वह इसे रोज़ाना इस्तेमाल भी करता है, लेकिन चोरी की जाँच के लिए इसका इस्तेमाल नहीं करता। पुलिस का दावा है कि चोर अब Apple के trade-in program (पुराने iPhone के बदले नया लेने की सुविधा) का फायदा उठाकर चोरी किए गए iPhones को वैध रूप से बदलवा रहे हैं और बदले में पैसे या क्रेडिट पा रहे हैं।

लंदन में चोरी हुए 80,000 से ज़्यादा iPhones! पुलिस ने Apple पर लगाया बड़ा आरोप

क्या है Apple का Trade-in प्रोग्राम?

Apple का Trade-in program ग्राहकों को यह सुविधा देता है कि वे अपना पुराना iPhone देकर नए iPhone की खरीद पर छूट या क्रेडिट पा सकें। कंपनी पुराने फोन की स्थिति देखकर ग्राहकों को £670 (लगभग ₹70,000) तक का क्रेडिट देती है।

लेकिन अब पुलिस का कहना है कि इस सिस्टम में सुरक्षा जांच की कमी के कारण चोरी किए गए iPhones भी इस प्रक्रिया में शामिल हो रहे हैं। यानी, चोर चोरी किया हुआ फोन लेकर Apple स्टोर या ऑनलाइन पोर्टल पर जमा कर देते हैं, और Apple बिना यह जांचे कि फोन चोरी हुआ है या नहीं, उन्हें बदले में पैसे या नया फोन दे देता है।

NMPR डेटाबेस क्या करता है?

National Mobile Property Register (NMPR) यूनाइटेड किंगडम में चलने वाला एक डेटाबेस है, जो पुलिस को चोरी हुए मोबाइल फोनों की जानकारी ट्रैक करने और उन्हें असली मालिक तक पहुँचाने में मदद करता है।

जब भी कोई फोन चोरी होता है, उसका IMEI नंबर (हर मोबाइल का यूनिक पहचान नंबर) NMPR डेटाबेस में दर्ज कर दिया जाता है।
पुलिस का कहना है कि अगर Apple हर trade-in फोन को NMPR से मिलान करे, तो चोरी किए गए फोन सिस्टम में प्रवेश नहीं कर पाएंगे।

लेकिन Apple ऐसा नहीं कर रहा है, जिससे चोरों को फायदा मिल रहा है।

लंदन में चोरी हुए 80,000 से ज़्यादा iPhones! पुलिस ने Apple पर लगाया बड़ा आरोप

चोरी का बढ़ता आंकड़ा

लंदन में चोरी हुए 80,000 से ज़्यादा iPhones! पुलिस ने Apple पर लगाया बड़ा आरोप

Met Police के अनुसार, केवल साल 2024 में 80,000 से ज़्यादा फोन लंदन में चोरी हुए, जो 2023 के 64,000 मामलों से काफ़ी ज़्यादा है।

पुलिस का अनुमान है कि इन चोरी हुए फोनों की कुल कीमत करीब £50 मिलियन (लगभग ₹525 करोड़) है।
चौंकाने वाली बात यह है कि इन चोरी हुए फोनों में से 75% से ज़्यादा iPhones होते हैं, और ज़्यादातर फोन विदेशों में बेचे जाते हैं या उनके पार्ट्स निकालकर बेच दिए जाते हैं।

लंदन में चोरी हुए 80,000 से ज़्यादा iPhones! पुलिस ने Apple पर लगाया बड़ा आरोप

पुलिस का आरोप: Apple कर रहा है “अनदेखी”

Met Police का कहना है कि Apple चोरी हुए फोनों की जाँच करने के लिए NMPR का इस्तेमाल नहीं कर रहा है।
उनका दावा है कि कंपनी के पास डेटाबेस की पहुँच है और वह इसे रोज़ इस्तेमाल करती है, लेकिन चोरी की जानकारी को चेक नहीं करती।

इस वजह से चोर Apple के सिस्टम में आसानी से चोरी के फोन डालकर trade-in के ज़रिए पैसा बना रहे हैं।
पुलिस का यह भी कहना है कि अगर Apple थोड़ी सख़्ती दिखाए, तो हज़ारों चोरी के iPhones की पहचान की जा सकती है और चोरी का बड़ा नेटवर्क पकड़ा जा सकता है।

Apple का जवाब: “हमारी तकनीक मज़बूत है”

Apple ने अपने बचाव में कहा कि वह चोरी रोकने के लिए कई नई सुविधाएँ ला चुका है।
कंपनी का कहना है कि उसने Stolen Device Protection नामक फीचर शुरू किया है, जो किसी भी चोरी हुए iPhone को बिना असली मालिक की जानकारी के रीसेट या इस्तेमाल नहीं करने देता।

इसके अलावा, Apple यह भी सोच रहा है कि चोरी हुए iPhones को IMEI नंबर के ज़रिए ब्लॉक करने की सुविधा लाई जाए।
हालाँकि कंपनी का कहना है कि इस सिस्टम का दुरुपयोग भी हो सकता है, क्योंकि कुछ लोग झूठे चोरी के दावे करके दूसरों के फोन ब्लॉक करा सकते हैं।

Apple ने Met Police पर पलटवार करते हुए कहा कि पुलिस को “परंपरागत तरीके से जांच” जारी रखनी चाहिए — यानी, चोरी की रिपोर्ट आने पर वे Apple से आधिकारिक तौर पर संपर्क करें, ताकि फोन की स्थिति सत्यापित की जा सके।

विशेषज्ञों की राय

तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला केवल Apple तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि मोबाइल चोरी अब संगठित अपराध का हिस्सा बन चुकी है।
ब्रिटेन, यूरोप और एशिया के कई देशों में चोरी किए गए फोनों के पुर्ज़े बेचने का एक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है।

कई बार ये फोन “रीफर्बिश्ड” (मरम्मत कर दोबारा बेचे गए) के रूप में अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में पहुंच जाते हैं।

लंदन में चोरी हुए 80,000 से ज़्यादा iPhones! पुलिस ने Apple पर लगाया बड़ा आरोप

iPhone यूज़र्स के लिए चेतावनी

लंदन में चोरी हुए करीब 80% स्मार्टफोनों में iPhones शामिल हैं।
इससे साफ है कि iPhone चोरों का पसंदीदा टारगेट बन गया है — इसकी ऊँची कीमत और ब्रांड वैल्यू की वजह से।

यूज़र्स के लिए कुछ ज़रूरी सुझाव:

  1. Face ID / Passcode ज़रूर लगाएँ।

  2. Find My iPhone फीचर हमेशा चालू रखें।

  3. किसी सार्वजनिक जगह पर फोन का इस्तेमाल करते समय सतर्क रहें।

  4. चोरी होने पर तुरंत पुलिस में रिपोर्ट करें और IMEI नंबर ब्लॉक कराएँ।

निष्कर्ष

लंदन में iPhone चोरी का यह मामला केवल एक शहर की समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया में बढ़ते डिजिटल अपराध की तस्वीर दिखाता है।
Apple और पुलिस दोनों अपनी-अपनी जगह सही ठहर रहे हैं — लेकिन बीच में सबसे ज़्यादा नुकसान आम लोगों को हो रहा है, जो अपनी मेहनत की कमाई से महंगा iPhone खरीदते हैं और फिर कुछ सेकंड में उसे खो देते हैं।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या Apple अपने trade-in system में सुधार करता है या यह विवाद और बढ़ेगा।

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