दुनिया भर के क्रिकेट प्रेमियों के लिए यह दिन हमेशा यादगार रहेगा। महिला विश्व कप 2025 का फाइनल मैच भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेला गया, और इस मुकाबले में भारत ने शानदार जीत दर्ज की। टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया को 52 रन से हराकर पहली बार महिला विश्व कप का खिताब अपने नाम किया। यह जीत न सिर्फ मैदान पर, बल्कि हर भारतीय के दिल में दर्ज हो गई।
पहले बल्लेबाज़ी करते हुए भारत ने बनाए शानदार रन
फाइनल मैच में भारत ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करने का फैसला किया। शुरुआत थोड़ी धीमी रही, लेकिन ओपनर स्मृति मंधाना और शेफाली वर्मा ने टीम को मज़बूत नींव दी। दोनों बल्लेबाज़ों ने बेहतरीन शॉट्स खेले और दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। स्मृति मंधाना ने 87 रनों की पारी खेली, जबकि शेफाली ने 64 रन जोड़े। दोनों के बीच 120 रनों की साझेदारी ने भारत को मज़बूत स्थिति में पहुंचा दिया।
इसके बाद कप्तान हरमनप्रीत कौर मैदान पर उतरीं। उन्होंने आते ही तेजी से रन बनाए और विपक्षी गेंदबाजों पर दबाव बढ़ाया। हरमनप्रीत ने 55 गेंदों में 73 रन ठोके, जिसमें 6 चौके और 3 छक्के शामिल थे। उनकी बल्लेबाज़ी ने पूरे स्टेडियम को जोश से भर दिया।
अंत में ऋचा घोष और दीप्ति शर्मा ने तेजी से रन जोड़ते हुए भारत का स्कोर 50 ओवर में 278 रन तक पहुंचा दिया। यह लक्ष्य फाइनल जैसे बड़े मुकाबले में काफी चुनौतीपूर्ण था।
ऑस्ट्रेलिया की पारी – शुरुआत अच्छी, लेकिन भारत का पलड़ा भारी
भारत ने महिला विश्व कप फाइनल में 52 रन से रचा इतिहास | Women’s World Cup Final 2025
लक्ष्य का पीछा करने उतरी ऑस्ट्रेलिया टीम की शुरुआत शानदार रही। उनके ओपनर्स ने तेज़ी से रन बनाए, लेकिन भारत की गेंदबाजों ने धैर्य नहीं खोया। नए गेंद के साथ रेणुका सिंह ठाकुर ने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने अपनी सटीक लाइन और लेंथ से ऑस्ट्रेलिया की टॉप ऑर्डर को हिलाकर रख दिया।
पहला झटका तब लगा जब रेणुका ने बेथ मूनी को क्लीन बोल्ड कर दिया। इसके बाद दीप्ति शर्मा ने अपने स्पिन जादू से दो महत्वपूर्ण विकेट झटके। धीरे-धीरे ऑस्ट्रेलिया की रनगति धीमी होती गई। एक समय पर उनका स्कोर 110/2 था, लेकिन इसके बाद भारतीय गेंदबाजों ने कमाल कर दिया।
पूरे मैच में ऑस्ट्रेलिया की टीम 47.3 ओवर में 226 रन पर सिमट गई। भारत ने यह मैच 52 रन से जीतकर इतिहास रच दिया।
हर खिलाड़ी का योगदान
इस जीत में हर खिलाड़ी का महत्वपूर्ण योगदान रहा। बल्लेबाज़ी में मंधाना, शेफाली और हरमनप्रीत ने शानदार रन बनाए, वहीं गेंदबाज़ी में रेणुका सिंह ठाकुर, दीप्ति शर्मा और पूनम यादव ने कमाल दिखाया।
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रेणुका सिंह ठाकुर – 4 विकेट
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दीप्ति शर्मा – 3 विकेट
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पूनम यादव – 2 विकेट
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राजेश्वरी गायकवाड़ – 1 विकेट
इन सभी के संयुक्त प्रदर्शन ने भारत को वह मुकाम दिलाया, जिसका सपना हर भारतीय फैन देखता आया है।
हरमनप्रीत कौर – असली कप्तान, असली हीरो
हरमनप्रीत कौर ने बतौर कप्तान एक मिसाल पेश की। उन्होंने पूरी टीम को आत्मविश्वास दिया और हर मुश्किल स्थिति में लड़ाई जारी रखी। मैच के बाद उन्होंने कहा –
“यह जीत सिर्फ हमारी नहीं, पूरे भारत की है। हमने इस खिताब के लिए बहुत मेहनत की थी और आज वह मेहनत रंग लाई।”
उनकी यह बात हर भारतीय के दिल में उतर गई। हरमनप्रीत ने साबित किया कि जब इरादे मज़बूत हों तो कोई भी सपना असंभव नहीं।
स्मृति मंधाना को मिला ‘प्लेयर ऑफ द मैच’
स्मृति मंधाना को उनकी शानदार बल्लेबाज़ी के लिए “प्लेयर ऑफ द मैच” चुना गया। उन्होंने अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई और फाइनल जैसे बड़े मैच में टीम को मज़बूत शुरुआत दिलाई। उनके शॉट्स देखकर हर कोई उनकी तारीफ करने लगा।
स्मृति ने कहा –
“जब हम मैदान पर उतरे तो सिर्फ एक बात दिमाग में थी — ट्रॉफी घर लानी है। और हमने वो कर दिखाया!”
पूरा देश जश्न में डूबा

भारत की इस ऐतिहासिक जीत के बाद पूरे देश में जश्न का माहौल है। हर शहर, हर गली में लोगों ने आतिशबाज़ी की, तिरंगा लहराया और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए। सोशल मीडिया पर भी बधाइयों की बाढ़ आ गई। प्रधानमंत्री से लेकर आम नागरिक तक, सबने टीम इंडिया को सलाम किया।
क्रिकेट एक्सपर्ट्स ने भी कहा कि यह जीत भारतीय महिला क्रिकेट का सुनहरा अध्याय है। इससे आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा मिलेगी।
टीम इंडिया का संघर्ष और सफलता की कहानी
यह जीत सिर्फ एक मैच की कहानी नहीं है, बल्कि सालों की मेहनत और संघर्ष का परिणाम है। भारतीय महिला टीम ने धीरे-धीरे अपने खेल को नई ऊंचाई पर पहुंचाया है। कभी टीम को सपोर्ट करने वाले लोग गिने-चुने थे, लेकिन आज पूरा देश इनकी जीत पर गर्व कर रहा है।
भारत की यह सफलता दिखाती है कि महिला क्रिकेट अब किसी भी मायने में पुरुष क्रिकेट से कम नहीं। अब लड़कियां भी बड़े मंच पर अपनी ताकत और प्रतिभा दिखा रही हैं।
भविष्य की ओर कदम
इस जीत के साथ भारत ने न सिर्फ ट्रॉफी जीती, बल्कि आने वाली पीढ़ी के लिए एक मजबूत नींव रखी है। छोटे शहरों और गांवों से अब और भी लड़कियां क्रिकेट में अपना करियर बनाना चाहेंगी। यह जीत उनके लिए उम्मीद की नई किरण है।
हरमनप्रीत की यह टीम आने वाले समय में और भी बड़े कीर्तिमान बनाएगी — ऐसा पूरा देश उम्मीद कर रहा है।
निष्कर्ष
भारत ने महिला विश्व कप फाइनल में 52 रन से जीत दर्ज कर इतिहास रच दिया। यह जीत सिर्फ क्रिकेट की नहीं, बल्कि महिलाओं की मेहनत, जुनून और आत्मविश्वास की जीत है।
आज भारत की बेटियों ने साबित कर दिया कि अगर इरादे सच्चे हों, तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता।
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