तेजस्वी यादव का वादा: जीविका दीदियों को स्थायी नौकरी और ₹30000 वेतन NDA ने बताया खोखली

तेजस्वी यादव का वादा: जीविका दीदियों को स्थायी नौकरी और ₹30000 वेतन NDA ने बताया खोखली

Spread the love

तेजस्वी यादव का वादा: जीविका दीदियों को स्थायी नौकरी और ₹30000 वेतन NDA ने बताया खोखली

तेजस्वी यादव का वादा: जीविका दीदियों को स्थायी नौकरी और ₹30000 वेतन NDA ने बताया खोखली

बिहार की राजनीति में इन दिनों चुनावी सरगर्मी तेज है। हर दल अपने-अपने वादों और घोषणाओं के जरिए जनता को आकर्षित करने की कोशिश में जुटा है। इसी कड़ी में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने एक बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि अगर उनकी सरकार बनती है तो राज्य की सभी ‘जीविका दीदियों’ को स्थायी नौकरी दी जाएगी और उन्हें हर महीने 30,000 रुपये का वेतन मिलेगा।

तेजस्वी यादव का यह ऐलान बिहार की महिलाओं के बीच चर्चा का बड़ा विषय बन गया है, क्योंकि ‘जीविका दीदियां’ राज्य के ग्रामीण इलाकों में विकास और स्वावलंबन की रीढ़ मानी जाती हैं। हालांकि, एनडीए (NDA) ने तेजस्वी के इस वादे को “खोखला और चुनावी जुमला” बताते हुए इसे जनता को भ्रमित करने की कोशिश करार दिया है।

जीविका दीदियों की भूमिका क्या है?

‘जीविका’ बिहार सरकार की ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत चलने वाली एक महत्वपूर्ण योजना है, जिसे बिहार ग्रामीण आजीविका मिशन (BRLPS) कहा जाता है।
इस योजना के तहत लाखों महिलाएं स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी हुई हैं। ये महिलाएं न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधार रही हैं, बल्कि गांवों में स्वरोजगार, बचत और सामाजिक जागरूकता के माध्यम से परिवर्तन ला रही हैं।

राज्य में फिलहाल करीब 1.2 करोड़ से अधिक महिलाएं जीविका समूहों से जुड़ी हैं, जिन्हें स्थानीय स्तर पर “जीविका दीदियां” कहा जाता है। ये महिलाएं सिलाई, बुनाई, पशुपालन, डेयरी, हस्तशिल्प और अन्य छोटे व्यवसायों के जरिए आय अर्जित करती हैं।

तेजस्वी यादव का वादा

तेजस्वी यादव ने अपने हालिया चुनावी भाषण में कहा —

“बिहार की ‘जीविका दीदियां’ राज्य की असली ताकत हैं। इन दीदियों ने अपने मेहनत और ईमानदारी से बिहार के गांवों में बदलाव की कहानी लिखी है। अब समय आ गया है कि उन्हें सम्मानजनक वेतन और स्थायी रोजगार मिले। हमारी सरकार बनी तो हर जीविका दीदी को स्थायी नौकरी और 30,000 रुपये मासिक वेतन दिया जाएगा।”

उन्होंने आगे कहा कि महिलाओं के बिना बिहार का विकास अधूरा है। जिस तरह जीविका दीदियां सरकारी योजनाओं के अंतिम छोर तक पहुंचाने में सहयोग देती हैं, उन्हें अस्थायी मानकर छोड़ देना अन्याय है।

एनडीए का पलटवार: “खोखले वादे और झूठे सपने”

तेजस्वी यादव के इस वादे पर एनडीए के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
भाजपा के एक प्रवक्ता ने कहा —

“तेजस्वी यादव केवल चुनाव आने पर वादे करते हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल में क्या किया? जिन दीदियों की बात वह कर रहे हैं, उनके लिए अधिकांश योजनाएं नीतीश कुमार सरकार ने ही शुरू की हैं। अब चुनाव से पहले सिर्फ झूठे सपने दिखाकर वोट बटोरने की कोशिश की जा रही है।”

जेडीयू (JDU) ने भी कहा कि जीविका मिशन पहले से ही सरकारी सहयोग में सफल योजना है। इसमें शामिल महिलाओं को लगातार लोन, प्रशिक्षण और सरकारी मदद दी जा रही है।
जेडीयू प्रवक्ता ने कहा —

“तेजस्वी यादव को पहले यह बताना चाहिए कि उनके पास फंड कहां से आएगा? अगर हर दीदी को 30,000 रुपये महीना देना है तो बजट कितना होगा और कौन देगा? ये बातें सिर्फ भाषणों तक सीमित हैं।”

चुनावी गणित और महिलाओं का वोट बैंक

तेजस्वी यादव का वादा: जीविका दीदियों को स्थायी नौकरी और ₹30000 वेतन NDA ने बताया खोखली

बिहार की राजनीति में महिलाओं का वोट बैंक बहुत अहम है। जीविका योजना के जरिए लाखों महिलाएं सरकारी योजनाओं से सीधे जुड़ी हैं।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि तेजस्वी यादव का यह ऐलान सीधे महिला मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश है

एक राजनीतिक विश्लेषक के अनुसार —

“तेजस्वी यादव यह जानते हैं कि ग्रामीण महिलाएं अब राजनीति को समझने लगी हैं। जीविका समूहों के जरिए वे सरकारी योजनाओं का हिस्सा बनी हैं। अगर वे रोजगार और वेतन जैसी बात करें तो यह वर्ग भावनात्मक रूप से उनसे जुड़ सकता है।”

आम जनता की राय

तेजस्वी यादव के वादे पर लोगों की राय बंटी हुई है।
कुछ महिलाएं इसे “उम्मीद की किरण” मान रही हैं, तो कुछ इसे “चुनावी जुमला” कह रही हैं।
गया जिले की एक जीविका दीदी ने कहा —

“अगर सच में हमें 30,000 रुपये महीना मिले तो हमारी जिंदगी बदल जाएगी। अभी हम छोटी रकम में घर और बच्चों को संभालते हैं।”

वहीं, पटना की एक शिक्षिका ने कहा —

“राजनीति में हर बार ऐसे वादे किए जाते हैं, लेकिन सरकार बनने के बाद उन्हें भूल जाते हैं। उम्मीद है कि अगर वादा किया गया है, तो इस बार पूरा भी होगा।”

क्या यह वादा आर्थिक रूप से संभव है?

अगर अनुमान लगाया जाए कि बिहार में करीब 1 करोड़ जीविका दीदियां हैं, तो सभी को 30,000 रुपये महीना देने के लिए प्रति माह 30,000 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।
सालाना यह राशि करीब 3.6 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी, जो बिहार के कुल वार्षिक बजट से कई गुना ज्यादा है।

वित्त विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी बड़ी राशि किसी राज्य के लिए वहन करना लगभग असंभव है। इसलिए एनडीए का यह कहना कि वादा “खोखला” है, आर्थिक दृष्टि से गलत नहीं लगता।

राजनीति में महिलाओं की भूमिका

यह भी सच है कि बिहार में महिलाएं अब केवल घर तक सीमित नहीं हैं। जीविका योजना ने उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनाया है।
अब वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक रीढ़ हैं, बल्कि सामाजिक बदलाव की अग्रदूत भी हैं।
तेजस्वी यादव का यह कदम महिलाओं को “सम्मान” देने का प्रतीक माना जा सकता है, भले ही इसकी व्यावहारिकता पर सवाल हों।

आगे क्या?

तेजस्वी यादव ने कहा है कि इस वादे को वे अपने घोषणापत्र में औपचारिक रूप से शामिल करेंगे। उन्होंने यह भी जोड़ा कि बिहार की अर्थव्यवस्था में सुधार कर, निवेश बढ़ाकर और भ्रष्टाचार खत्म कर वे इस योजना को वास्तविक रूप दे सकते हैं।

वहीं एनडीए ने स्पष्ट किया है कि वे इस तरह के “अवास्तविक वादों” की राजनीति से दूर हैं और उनके लिए “काम बोलता है, भाषण नहीं।”

FAQ :

Q1. जीविका दीदियों क्या हैं?
A1. जीविका दीदियां बिहार की ग्रामीण महिलाओं का समूह हैं, जो राज्य की ग्रामीण आजीविका मिशन (BRLPS) के तहत स्वरोजगार, प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं में काम करती हैं।

Q2. तेजस्वी यादव ने जीविका दीदियों के लिए क्या वादा किया है?
A2. उन्होंने कहा है कि अगर उनकी सरकार बनी, तो सभी जीविका दीदियों को स्थायी नौकरी और 30,000 रुपये मासिक वेतन मिलेगा।

Q3. एनडीए का इस वादे पर क्या रुख है?
A3. एनडीए ने इसे “खोखली बात” कहा है और कहा कि यह केवल चुनावी जुमला है और आर्थिक रूप से संभव नहीं लगता।

Q4. कितनी महिलाएं जीविका योजना से जुड़ी हैं?
A4. वर्तमान में लगभग 1.2 करोड़ महिलाएं बिहार में जीविका समूहों से जुड़ी हैं।

Q5. यह वादा आर्थिक रूप से कितना व्यावहारिक है?
A5. सभी जीविका दीदियों को 30,000 रुपये प्रति माह देने पर सालाना लगभग 3.6 लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे, जो बिहार के बजट से कई गुना अधिक है।

निष्कर्ष

बिहार की राजनीति में यह वादा निश्चय ही चर्चा का केंद्र बन गया है।
एक ओर तेजस्वी यादव महिलाओं को सम्मान और आर्थिक सुरक्षा का भरोसा दे रहे हैं, वहीं एनडीए इसे सिर्फ चुनावी चाल बता रहा है।
सच्चाई यह है कि अगर कोई भी सरकार इस तरह के वादों को सच में लागू करना चाहती है, तो उसे ठोस आर्थिक नीति और पारदर्शी व्यवस्था बनानी होगी।

भविष्य में यह देखना दिलचस्प होगा कि तेजस्वी यादव का यह ऐलान बिहार की जनता को कितना प्रभावित करता है और क्या वाकई यह “खोखला वादा” साबित होता है या महिलाओं के लिए नई उम्मीद बनता है।

Read more :

👉 Bihar Election Breaking: Administration on alert after weapons found in independent candidate’s car in Siwan

👉 Election Commission of India sets mid-November date for SIR process in Bengal

One comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *