तीज व्रत 2025: शुभ मुहूर्त, व्रत विधि और पूजा सामग्री सूची

भारत में तीज का पर्व स्त्रियों के लिए बेहद खास होता है। सावन महीने में आने वाला यह त्योहार हरियाली तीज या श्रावणी तीज के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन माता पार्वती ने भगवान शिव को अपने कठोर व्रत और तपस्या से पति रूप में प्राप्त किया था। इसलिए सुहागिन स्त्रियाँ इस दिन व्रत रखती हैं और अविवाहित कन्याएँ भी अच्छे वर की प्राप्ति के लिए पूजा करती हैं।
तीज व्रत का इतिहास
तीज व्रत का इतिहास बहुत पुराना है और यह सीधे माता पार्वती और भगवान शिव की कथा से जुड़ा हुआ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उन्होंने जन्म-जन्मांतर तक अनेक तप किए और 108 बार जन्म लेकर भी केवल शिवजी को पाने का ही संकल्प लिया।
कहते हैं कि माता पार्वती ने अपने 108वें जन्म में हिमालय की गुफाओं में कठोर तपस्या की थी। उनकी इस भक्ति और समर्पण से भगवान शिव प्रसन्न हुए और उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। यह मिलन सावन मास की तृतीया तिथि को हुआ था। तभी से इस दिन को तीज व्रत के रूप में मनाया जाने लगा।
इतिहासकारों के अनुसार, तीज व्रत का उल्लेख पुराणों और प्राचीन धार्मिक ग्रंथों में भी मिलता है। स्कंद पुराण और शिव पुराण में यह वर्णन मिलता है कि सावन मास में स्त्रियाँ इस व्रत को करती थीं और इससे उनके वैवाहिक जीवन में सुख और समृद्धि आती थी।
तीज 2025 का शुभ मुहूर्त
तीज व्रत और पूजा का सबसे बड़ा महत्व सही समय पर पूजा करने का है। इस वर्ष तीज का पर्व शुभ योग में मनाया जाएगा।
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तीज 2025 की तिथि: 7 अगस्त 2025 (गुरुवार)
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व्रत आरंभ होने का समय: प्रातः 06:10 बजे से
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पूजा का शुभ मुहूर्त: सुबह 08:45 बजे से 11:30 बजे तक
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व्रत पारण का समय: अगले दिन सूर्योदय के बाद
इस समय के दौरान यदि शिव-पार्वती की पूजा की जाए तो व्रती को अधिकतम पुण्य और फल की प्राप्ति होती है।
तीज व्रत विधि
तीज व्रत को विधि-विधान से करने से दांपत्य जीवन सुखी और समृद्ध होता है। आइए जानते हैं पूजा की सही प्रक्रिया:
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सुबह स्नान और शुद्ध वस्त्र धारण करें – व्रती को सुबह जल्दी उठकर पवित्र स्नान करना चाहिए और लाल, हरे या पीले रंग के वस्त्र पहनने चाहिए।
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व्रत का संकल्प लें – माता पार्वती का ध्यान करते हुए पति की लंबी आयु और वैवाहिक सुख के लिए व्रत का संकल्प लें।
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माता पार्वती और भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित करें – पूजा स्थान को स्वच्छ करके उस पर शिव-पार्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
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श्रृंगार का महत्व – तीज पर सुहागिन महिलाएँ 16 श्रृंगार करती हैं। इसमें चूड़ी, बिंदी, सिंदूर, मेहंदी, गहने आदि शामिल होते हैं। यह सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।
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पूजा सामग्री अर्पित करें – जल, दूध, बेलपत्र, पुष्प, धूप, दीपक, नैवेद्य, मिठाई, फल और पान शिव-पार्वती को अर्पित करें।
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कथा श्रवण और भजन – इस दिन तीज व्रत की कथा सुनना और भजन-कीर्तन करना शुभ माना जाता है।
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रात्रि जागरण – कई स्थानों पर महिलाएँ रातभर गीत-संगीत करती हैं और जागरण करती हैं।
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व्रत पारण – अगले दिन सूर्योदय के बाद ब्राह्मणों और सुहागिन महिलाओं को भोजन कराकर स्वयं व्रत का पारण करें।
🪔 तीज पूजा सामग्री सूची
तीज व्रत 2025: शुभ मुहूर्त, व्रत विधि और पूजा सामग्री सूची
तीज व्रत को पूर्ण विधि से करने के लिए पूजा सामग्री का सही होना आवश्यक है। यहाँ पूरी सूची दी जा रही है:
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भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या चित्र
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पूजा थाली और कलश
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गंगाजल और शुद्ध जल
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दूध, दही, शहद
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बेलपत्र, अक्षत (चावल), रोली और हल्दी
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लाल, पीले और हरे पुष्प
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धूपबत्ती और घी/तेल का दीपक
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मिठाई और मौसमी फल
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पान, सुपारी और नारियल
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श्रृंगार की वस्तुएँ (सिंदूर, चूड़ी, मेहंदी, बिंदी, काजल आदि)
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वस्त्र और आभूषण
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तीज व्रत कथा पुस्तक या कथा सामग्री
निष्कर्ष
तीज का पर्व केवल उपवास और पूजा का नहीं बल्कि पति-पत्नी के रिश्ते की मजबूती और परिवार की खुशहाली का प्रतीक है। सही समय पर, पूरी श्रद्धा और विधि से किया गया तीज व्रत जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाता है।
इस तीज 2025 पर आप भी शुभ मुहूर्त में व्रत करें, पूजा सामग्री की पूरी व्यवस्था करें और माता पार्वती व भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करें।
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