तीज व्रत 2025: पति-पत्नी करें ये 3 काम, रिश्तों में आएगी मिठास

क्यों ज़रूरी है पति-पत्नी का मिलकर तीज मनाना?
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आपसी विश्वास बढ़ता है – जब पति भी इस दिन पत्नी के साथ खड़ा होता है तो पत्नी को मानसिक बल मिलता है।
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रिश्ते में समानता आती है – केवल पत्नी ही नहीं, बल्कि पति भी इस दिन सहयोग करे तो यह रिश्ते को संतुलित बनाता है।
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प्यार और अपनापन गहराता है – पूजा, व्रत और त्योहार एक साथ मनाने से भावनात्मक जुड़ाव बढ़ता है।
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सकारात्मक ऊर्जा आती है – धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से यह दिन शुभ फल देने वाला होता है।
तीज व्रत में पति-पत्नी के लिए 3 खास काम
1. मिलकर करें पूजा और व्रत का संकल्प
तीज व्रत का सबसे बड़ा आकर्षण है शिव-पार्वती की पूजा। परंपरा के अनुसार, पत्नी उपवास रखती है और पूजा करती है। लेकिन अगर पति भी इस दिन पत्नी के साथ बैठकर पूजा में शामिल हो जाए तो इसका प्रभाव कई गुना अधिक हो जाता है।
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पति का सहयोग: पति अगर पत्नी के व्रत को समझे, उसके साथ दिनभर सहयोग करे और पूजा में शामिल हो तो पत्नी को मानसिक शांति मिलती है।
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संयुक्त प्रार्थना का महत्व: जब दोनों पति-पत्नी एक साथ भगवान शिव और माता पार्वती से आशीर्वाद माँगते हैं, तो यह रिश्ते में सकारात्मकता लाता है।
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वैज्ञानिक दृष्टि से: संयुक्त रूप से कोई कार्य करने से आपसी तालमेल और भावनात्मक जुड़ाव मजबूत होता है।
अगर पति-पत्नी मिलकर इस दिन पूजा करें तो यह उनके रिश्ते के लिए शुभ संकेत माना जाता है। जैसे शिव और पार्वती का रिश्ता अटूट और शाश्वत है, वैसे ही वैवाहिक जीवन भी स्थिर और सुखद बना रहता है।
2. संवाद और आभार व्यक्त करना
अक्सर व्यस्त जीवन में हम अपने जीवनसाथी को धन्यवाद कहने या अपनी भावनाएँ साझा करने का समय नहीं निकाल पाते। तीज जैसे पर्व रिश्ते को ताज़गी देने का सुनहरा अवसर हैं।
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मन की बात कहना: इस दिन पति-पत्नी एक-दूसरे से खुलकर बातचीत करें। छोटी-छोटी शिकायतें या मनमुटाव दूर करें।
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आभार जताना: पत्नी अगर पति को खुले मन से धन्यवाद दे कि वह उसके जीवन का सहारा है, और पति पत्नी को यह एहसास दिलाए कि वह उसके बिना अधूरा है, तो यह रिश्ते में मिठास घोल देता है।
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छोटी खुशियाँ मनाना: पति पत्नी को कोई छोटा-सा उपहार दे सकता है या पत्नी पति के लिए पसंदीदा खाना बना सकती है। ये छोटी-छोटी बातें रिश्ते को खास बनाती हैं।
कई बार शब्दों से ज्यादा असर छोटे gestures का होता है। तीज का दिन यही याद दिलाता है कि रिश्ते केवल जिम्मेदारियों से नहीं, बल्कि प्यार और सम्मान से चलते हैं।
3. साथ में समय बिताना और रिश्ते को सेलिब्रेट करना
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में पति-पत्नी के पास एक-दूसरे के लिए समय बहुत कम होता है। तीज का दिन खासतौर पर पति-पत्नी के रिश्ते को सेलिब्रेट करने का दिन है।
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झूला और गीतों की परंपरा: गाँव-शहरों में तीज पर झूला झूलने और गीत गाने की परंपरा है। पति अगर पत्नी के साथ इस माहौल में शामिल हो तो यह उनके रिश्ते में रोमांस और अपनापन बढ़ाता है।
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डिनर या आउटिंग: पूजा और व्रत के बाद पति-पत्नी साथ में डिनर कर सकते हैं या किसी खास जगह जा सकते हैं।
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परिवार के साथ समय: तीज केवल पति-पत्नी के लिए ही नहीं बल्कि पूरे परिवार को जोड़ने का मौका है। अगर दोनों परिवार मिलकर यह पर्व मनाएँ तो रिश्तों की मिठास और भी बढ़ जाती है।
रिश्तों को मजबूत बनाने के लिए समय देना सबसे जरूरी है। तीज का दिन इस बात की याद दिलाता है कि हमें रिश्तों को सेलिब्रेट करना चाहिए।
इन 3 कामों का असर
अगर पति-पत्नी तीज पर ये 3 काम करते हैं –
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मिलकर पूजा करना
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संवाद और आभार व्यक्त करना
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साथ में समय बिताना
तो यह उनके रिश्ते में विश्वास, प्यार और अपनापन कई गुना बढ़ा देता है। धार्मिक दृष्टि से यह शुभ है और सामाजिक दृष्टि से यह रिश्तों को और भी पवित्र बनाता है।
निष्कर्ष
तीज का पर्व केवल उपवास और पूजा का ही नहीं बल्कि रिश्तों को मजबूत करने का भी अवसर है।
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जब पति-पत्नी मिलकर पूजा और व्रत का संकल्प लेते हैं तो उनका संबंध धार्मिक आशीर्वाद से और भी पवित्र हो जाता है।
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जब वे एक-दूसरे से संवाद और आभार प्रकट करते हैं तो दिलों की दूरी मिट जाती है और रिश्ते में मिठास भर जाती है।
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जब वे साथ में समय बिताते हैं और रिश्ते को सेलिब्रेट करते हैं तो यह उनके वैवाहिक जीवन में रोमांस और अपनापन जोड़ देता है।
तीज हमें यही सिखाती है कि रिश्ता केवल जिम्मेदारियों और औपचारिकताओं से नहीं चलता, बल्कि उसमें प्यार, सम्मान, समय और एक-दूसरे के प्रति सहयोग ज़रूरी है। अगर पति-पत्नी हर साल इस दिन अपने रिश्ते को नए सिरे से जीने का संकल्प लें, तो उनका वैवाहिक जीवन शिव-पार्वती की तरह सुखद और अटूट हो सकता है।
FAQs – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1. क्या तीज का व्रत केवल पत्नी को ही करना चाहिए या पति भी कर सकता है?
परंपरा के अनुसार तीज का व्रत पत्नी रखती है, लेकिन आजकल कई पति भी प्रतीकात्मक रूप से पत्नी के साथ उपवास करते हैं। इससे रिश्ते में समानता और आपसी विश्वास बढ़ता है।
Q2. अगर पति तीज की पूजा में शामिल न हो पाए तो क्या व्रत अधूरा रह जाएगा?
ऐसा बिल्कुल नहीं है। लेकिन अगर पति पूजा में शामिल हो जाए तो इसका धार्मिक और भावनात्मक महत्व कई गुना बढ़ जाता है।
Q3. तीज पर पति पत्नी को क्या उपहार दे सकते हैं?
पति अपनी पत्नी को साड़ी, गहना, मेहंदी, या कोई छोटा-सा पर्सनल गिफ्ट दे सकते हैं। पत्नी भी पति को किताब, घड़ी या कोई यादगार चीज़ उपहार में दे सकती है।
Q4. तीज पर पति-पत्नी को कौन-सी गलतियों से बचना चाहिए?
इस दिन झगड़ा, कटु वचन या नकारात्मक सोच से बचना चाहिए। व्रत का असली फल तभी मिलेगा जब दिनभर का माहौल शांत और सकारात्मक हो।
Q5. क्या अविवाहित लड़कियाँ भी तीज का व्रत रख सकती हैं?
हाँ, अविवाहित कन्याएँ भी यह व्रत रख सकती हैं। मान्यता है कि इससे उन्हें मनचाहा वर प्राप्त होता है।
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