रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन साल के अंत में करेंगे भारत दौरा, दोनों देशों के बीच चल रही तैयारियां तेज
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) जल्द ही भारत आने वाले हैं। रूस की ओर से यह जानकारी दी गई है कि पुतिन इस साल के अंत तक भारत यात्रा पर आ सकते हैं। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने बताया कि भारत दौरे की तैयारी जोरों पर है और दोनों देशों के बीच कई अहम मुद्दों पर बातचीत चल रही है।

पुतिन आखिरी बार दिसंबर 2021 में भारत आए थे। इसके बाद 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू हो गया था। उस युद्ध के बाद यह पुतिन की पहली भारत यात्रा होगी। इस कारण यह दौरा न केवल भारत और रूस के लिए बल्कि पूरे विश्व के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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पेसकोव ने कहा, “हम इस यात्रा की पूरी तैयारी कर रहे हैं। अगर सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो इस साल के अंत में पुतिन भारत पहुंचेंगे। हमें उम्मीद है कि यह यात्रा दोनों देशों के रिश्तों के लिए एक बड़ा कदम साबित होगी।”
इस यात्रा के दौरान यह उम्मीद की जा रही है कि भारत और रूस के बीच नई रणनीतिक साझेदारी, रक्षा समझौते या ऊर्जा सहयोग को लेकर नई पहल हो सकती है। हालांकि, इस पर रूस की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है।
भारत और रूस के संबंध हमेशा से गहरे और भरोसेमंद रहे हैं। रक्षा, ऊर्जा, अवसंरचना और व्यापार जैसे कई क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच लंबे समय से साझेदारी रही है। रूस, भारत को सस्ता तेल उपलब्ध कराने वाले प्रमुख देशों में से एक है।
रूस से तेल आयात को लेकर अमेरिका और पश्चिमी देशों की ओर से भारत पर कई बार दबाव भी बनाया गया है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तो भारत के कुछ उत्पादों पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क भी लगाया था। उनका मानना था कि रूस तेल बिक्री से जो पैसा कमा रहा है, उसे युद्ध में इस्तेमाल कर रहा है।
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हालांकि, भारत ने हमेशा कहा है कि उसका व्यापारिक निर्णय उसके राष्ट्रीय हितों के अनुसार होता है। इसी बीच, पुतिन का यह भारत दौरा दुनिया के लिए एक सशक्त संदेश होगा कि भारत और रूस के रिश्ते अभी भी मजबूत हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच ऊर्जा, रक्षा उत्पादन, और क्षेत्रीय सुरक्षा पर अहम चर्चाएं हो सकती हैं। साथ ही, यह भी संभव है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पुतिन एक संयुक्त बयान जारी करें जिसमें दोनों देशों की साझेदारी को नए स्तर पर ले जाने की बात कही जाए।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच भारत ने हमेशा तटस्थ नीति अपनाई है। इसीलिए पुतिन का यह दौरा भारत की कूटनीतिक ताकत और संतुलित विदेश नीति का प्रमाण माना जा रहा है।

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