जितिया व्रत 2025: तिथि, शुभ मुहूर्त और ज्योतिषीय महत्व

जितिया व्रत 2025: तिथि, शुभ मुहूर्त और ज्योतिषीय महत्व

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भारतीय परंपराओं और त्योहारों में जितिया व्रत का विशेष महत्व है। खासकर बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में इसे बड़े श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया जाता है। यह व्रत माताएँ अपने संतान की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य के लिए करती हैं। जितिया व्रत 2025 की तिथि और समय ज्योतिष के अनुसार बेहद खास है क्योंकि इस वर्ष कई शुभ योग और ग्रह-नक्षत्रों का संयोग बन रहा है। इस लेख में हम जानेंगे जितिया 2025 की तिथि, पूजा विधि, ज्योतिषीय महत्व और शुभ योग की विस्तृत जानकारी।

जितिया-व्रत-2025

 जितिया व्रत 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त

ज्योतिष पंचांग के अनुसार, जितिया व्रत 2025 भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाएगा।

  • जितिया व्रत 2025 की तिथि: 21 सितंबर 2025 (रविवार)

  • अष्टमी तिथि प्रारंभ: 20 सितंबर 2025, रात 09:42 बजे से

  • अष्टमी तिथि समाप्त: 21 सितंबर 2025, रात 07:55 बजे तक

  • उपवास एवं पूजा का शुभ मुहूर्त: 21 सितंबर सूर्योदय से आरंभ होकर चंद्रोदय तक

  • चंद्रोदय समय: रात्रि 07:15 बजे (स्थान अनुसार थोड़ा भिन्न)

👉 इस बार अष्टमी तिथि रविवार को पड़ रही है, जो ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत शुभ मानी जाती है।

 इस बार का विशेष शुभ योग

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस वर्ष जितिया व्रत पर रोहिणी नक्षत्र और चंद्रमा का संयोग बन रहा है। इसके साथ ही रविवारीय अष्टमी का विशेष महत्व भी है।

  • रविवार का दिन – सूर्य देव का दिन, जिससे संतान सुख और आयु में वृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

  • रोहिणी नक्षत्र – चंद्रमा का प्रिय नक्षत्र, जो मातृत्व और संतान सुख से जुड़ा है।

  • गजकेसरी योग – इस योग के प्रभाव से संतान को लंबी उम्र, तेजस्विता और सौभाग्य मिलता है।

इस शुभ संयोग के कारण 2025 का जितिया व्रत अत्यंत फलदायी रहेगा।

 जितिया व्रत का महत्व

  1. संतान की दीर्घायु – यह व्रत माताएँ अपने बच्चों की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए रखती हैं।

  2. संकट निवारण – मान्यता है कि जितिया व्रत करने से संतान पर आने वाले संकट टल जाते हैं।

  3. सुख-समृद्धि – घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है।

  4. आध्यात्मिक लाभ – उपवास और पूजा से मन और आत्मा शुद्ध होती है।

 पौराणिक कथा

जितिया व्रत की सबसे प्रमुख कथा जीमूतवाहन से जुड़ी है।

कथा के अनुसार, जीमूतवाहन एक वीर और धर्मात्मा पुरुष थे। उन्होंने एक नागकन्या के पुत्र की रक्षा के लिए अपना जीवन दांव पर लगा दिया। उनके त्याग और बलिदान से प्रभावित होकर देवताओं ने उन्हें आशीर्वाद दिया और कहा कि इस कथा को सुनने और व्रत करने वाली माताओं की संतान की आयु लंबी होगी और वह हर संकट से बची रहेगी।

इसी कारण से माताएँ इस दिन निर्जला उपवास रखती हैं और जीमूतवाहन की कथा सुनकर पूजा करती हैं।

 पूजा विधि

जितिया व्रत की पूजा विधि बेहद सरल और पवित्र होती है।

  1. सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें।

  2. घर या मंदिर में जितमातान और जीमूतवाहन की पूजा करें।

  3. पूजा में धूप, दीप, फल, फूल और अक्षत का उपयोग करें।

  4. व्रत कथा सुनें और संतान के दीर्घायु जीवन के लिए प्रार्थना करें।

  5. महिलाएँ निर्जला उपवास करती हैं और चंद्रोदय के बाद व्रत खोलती हैं।

  6. अंत में दान-पुण्य करना शुभ माना जाता है।

ज्योतिषीय दृष्टि से लाभ

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस वर्ष जितिया व्रत पर शुभ योग बन रहे हैं, जिससे लाभ और भी बढ़ जाएगा।

  • मेष, कर्क, कन्या और मीन राशि की माताओं को विशेष फल प्राप्त होगा।

  • इस बार व्रत करने से संतान को विद्या, बल और स्वास्थ्य की प्राप्ति होगी।

  • जिन माताओं के बच्चे बीमार रहते हैं, उनके लिए यह व्रत विशेष रूप से लाभकारी होगा।

 क्षेत्रीय महत्व

  • बिहार और झारखंड – यहाँ जितिया व्रत को बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। महिलाएँ नदी या तालाब में स्नान कर व्रत का संकल्प लेती हैं।

  • उत्तर प्रदेश (पूर्वांचल) – इस क्षेत्र की महिलाएँ पूरे परिवार के साथ व्रत कथा सुनती हैं और लोकगीत गाती हैं।

  • नेपाल के तराई क्षेत्र में भी जितिया व्रत का महत्व बहुत ज्यादा है।

 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1. जितिया व्रत 2025 कब है?
Ans: 21 सितंबर 2025, रविवार को।

Q2. जितिया व्रत किसके लिए किया जाता है?
Ans: संतान की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य के लिए।

Q3. इस बार जितिया 2025 में कौन सा शुभ योग बन रहा है?
Ans: रोहिणी नक्षत्र, रविवारीय अष्टमी और गजकेसरी योग।

Q4. क्या जितिया व्रत निर्जला रखना जरूरी है?
Ans: हां, परंपरा के अनुसार महिलाएँ निर्जला उपवास करती हैं।

Q5. क्या जितिया व्रत सिर्फ बिहार-झारखंड में ही मनाया जाता है?
Ans: नहीं, यह व्रत यूपी और नेपाल में भी बहुत लोकप्रिय है।

 निष्कर्ष

जितिया व्रत 2025 इस बार बेहद खास होने जा रहा है क्योंकि ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति इसे और भी शुभ बना रही है। संतान की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना से माताएँ पूरे विश्वास और श्रद्धा के साथ यह व्रत रखेंगी। ज्योतिषीय दृष्टि से भी इस वर्ष बनने वाले योग इसे और भी फलदायी बना रहे हैं।

👉 इसलिए इस बार जितिया 2025 का व्रत हर माता को पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ अवश्य करना चाहिए, जिससे संतान को आशीर्वाद और माता को मानसिक शांति मिले।

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