परिचय
महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप 2025 के सेमीफाइनल में भारत की स्टार बल्लेबाज़ जेमिमा रोड्रिग्स (Jemimah Rodrigues) ने इतिहास रच दिया। ऑस्ट्रेलिया जैसी मज़बूत टीम के खिलाफ उन्होंने नाबाद 127 रन की पारी खेली और भारत को शानदार जीत दिलाई।

image source: @nibraz88cricket/X.com
लेकिन मैच के बाद सोशल मीडिया पर एक अजीब दावा तेजी से वायरल हुआ — “टीवी अंपायर ने DRS रीप्ले को एडिट करके जेमिमा को बचा लिया।”
कई फैंस ने ट्विटर (X) और फेसबुक पर स्क्रीनशॉट्स शेयर करते हुए कहा कि LBW अपील के रीप्ले में ‘इम्पैक्ट पॉइंट’ यानी गेंद और शरीर के टकराने की जगह बदल दी गई।
यह दावा सुनने में जितना सनसनीखेज था, सच्चाई उससे बिल्कुल उलट निकली।
इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे —
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यह वायरल दावा कैसे शुरू हुआ,
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DRS सिस्टम असल में कैसे काम करता है,
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और आखिर सच क्या है।
वायरल दावा: “DRS फुटेज में छेड़छाड़ हुई”
मैच के बाद एक ट्वीट वायरल हुआ जिसमें दो तस्वीरें दिखाई गईं — दोनों में जेमिमा रोड्रिग्स LBW अपील के दौरान नजर आ रही थीं।
पहली तस्वीर में गेंद उनके पैड से दूर लग रही थी, जबकि दूसरी में गेंद पैड के पास दिखी।
ट्वीट करने वाले ने दावा किया —
“देखिए, कैसे टीवी फुटेज में इम्पैक्ट पॉइंट बदल गया! DRS में गड़बड़ी कर बल्लेबाज को बचा लिया गया।”
कुछ ही घंटों में यह पोस्ट हजारों बार शेयर हो गया। कई विदेशी अकाउंट्स और कुछ भारतीय फैन पेजों ने भी इस दावे को आगे बढ़ाया।
लेकिन असलियत इसके बिलकुल विपरीत थी।
सच क्या है? पूरा फैक्ट-चेक
1. वीडियो फ्रेम्स का भ्रम
वीडियो असल में एक-एक तस्वीरों का समूह होता है जिन्हें बहुत तेज़ गति से चलाया जाता है (जैसे 30 या 60 फ्रेम प्रति सेकंड)।
यानि हर सेकंड में गेंद की 60 अलग-अलग स्थितियाँ दिखाई देती हैं।अगर कोई व्यक्ति दो अलग-अलग फ्रेम्स लेकर उनकी तुलना करे —
तो ऐसा लग सकता है कि “गेंद ने जगह बदल ली”,जबकि दोनों फ्रेम्स एक ही घटना के अलग-अलग क्षण होते हैं।
वायरल तस्वीरों में भी यही हुआ।पहली फोटो गेंद के पैड से टकराने से ठीक पहले की थी,और दूसरी टकराव के तुरंत बाद की।
इसलिए दोनों में गेंद की स्थिति थोड़ी अलग दिखी, जिससे भ्रम पैदा हुआ कि “रीप्ले बदल दिया गया”।
2. DRS प्रक्रिया में क्या होता है?
DRS (Decision Review System) एक सटीक और वैज्ञानिक प्रणाली है जिसमें कई तकनीकें शामिल होती हैं —
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UltraEdge / Snickometer: यह बताता है कि गेंद बैट से टकराई या नहीं।
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Ball Tracking (Hawk-Eye): यह दिखाता है कि गेंद कहाँ गिरी, इम्पैक्ट कहाँ हुआ और आगे कहाँ जाती।
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Hotspot: गर्मी के निशान से टकराव की पुष्टि होती है।
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Multiple Camera Angles: अलग-अलग कैमरों से रिकॉर्डिंग होती है ताकि किसी एक एंगल की गलती न रहे।
इस सिस्टम में किसी इंसान के हाथ से “रीप्ले एडिट” करना लगभग असंभव है क्योंकि डेटा सीधे कैमरों और सॉफ्टवेयर से अंपायर तक पहुँचता है।
मतलब — अगर कोई फ्रेम बदला भी जाए तो सिस्टम उसे स्वीकार नहीं करेगा।
3. क्यों असली फुटेज में कोई छेड़छाड़ नहीं हुई
आधिकारिक प्रसारणकर्ताओं (Star Sports / ICC feed) ने जो फुटेज जारी किया, उसमें कोई असमानता नहीं थी।
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हर एंगल से गेंद पैड से उसी जगह टकराती दिखाई दी।
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गेंद की दिशा, बाउंस और ट्रैकिंग एकसमान थी।
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अंपायर का निर्णय डेटा के आधार पर था, न कि किसी ‘फ्रेम’ पर।
इसलिए DRS में छेड़छाड़ का दावा तकनीकी रूप से असंभव और तथ्यात्मक रूप से गलत है।
कैसे फैला यह झूठ?
यह दावा सबसे पहले एक विदेशी पत्रकार द्वारा किया गया, जिन्होंने दो स्क्रीनशॉट्स को साथ रखकर ट्वीट किया।कुछ सोशल मीडिया पेजों ने बिना जाँच किए उसे साझा कर दिया।लोगों को यह दिलचस्प लगा क्योंकि यह “फिक्सिंग” जैसा प्रतीत हुआ — और क्रिकेट में विवाद तो जल्दी वायरल होते हैं।
कुछ मिनटों में ही #DRSManipulation ट्रेंड करने लगा।हालांकि बाद में ICC और कई क्रिकेट फैक्ट-पेजों ने इसे फेक न्यूज़ बताया।
जेमिमा रोड्रिग्स की ऐतिहासिक पारी
अब जरा उस पारी की बात करते हैं जिसने पूरे देश को गर्वित किया।
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स्कोर: 127* रन (134 गेंदों में)
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शॉट्स: 13 चौके और 2 छक्के
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मैच: भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया, वर्ल्ड कप 2025 सेमीफाइनल
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परिणाम: भारत ने 5 विकेट से जीत हासिल की।
उन्होंने शुरुआत में संभलकर खेला, फिर मिडल ओवर्स में आक्रमक बल्लेबाजी की।जब भारत को 250 रन के करीब पहुँचना मुश्किल लग रहा था,जेमिमा ने साझेदारी बनाकर मैच पलट दिया।
उनकी बल्लेबाजी के कारण भारत पहली बार वर्ल्ड कप फाइनल में पहुँचा — और उसी दिन यह ‘DRS विवाद’ ट्रेंड करने लगा।
DRS सिस्टम कैसे सुरक्षित है?
कई लोगों को लगता है कि टीवी रीप्ले “एडिट” किया जा सकता है, लेकिन असल में ऐसा नहीं है।यहाँ जानिए DRS को सुरक्षित रखने के कुछ तरीके —
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सभी कैमरे सीधे सर्वर से जुड़े होते हैं, जहां डेटा स्वतः रिकॉर्ड होता है।
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अंपायर का निर्णय लाइव डेटा पर आधारित होता है, किसी एडिटेड क्लिप पर नहीं।
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Hawk-Eye सॉफ्टवेयर का नियंत्रण ICC और उसके टेक्निकल पार्टनर्स के पास होता है, न कि किसी प्रसारक या टीम के पास।
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हर DRS निर्णय की लॉग फाइल और टाइम स्टैम्प सेव होती है — किसी भी बदलाव की संभावना शून्य होती है।
यानी अगर कोई बदलाव करने की कोशिश करे, तो सिस्टम तुरंत अलर्ट भेज देता है।
विशेषज्ञों की राय
पूर्व अंपायरों और क्रिकेट विश्लेषकों ने भी इस दावे को खारिज किया।
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एक तकनीकी विश्लेषक ने कहा,
“वायरल तस्वीरें अलग-अलग फ्रेम्स से ली गई हैं। यह सामान्य बात है कि तेज़ गेंद चलते वक्त हर फ्रेम में थोड़ी आगे दिखती है।”
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वहीं भारतीय टीम के कोच ने कहा,
“Jemimah की पारी ऐतिहासिक थी। ऐसे झूठे दावे खिलाड़ियों का मनोबल गिराने के लिए फैलाए जाते हैं।”
फेक न्यूज के खतरे

ऐसी झूठी खबरें सिर्फ खिलाड़ियों के लिए नहीं, बल्कि पूरे खेल के लिए हानिकारक होती हैं। जब कोई खिलाड़ी मेहनत से मैच जीतता है और कोई सोशल मीडिया पर उसके प्रयास को “मनिपुलेशन” बता देता है —तो यह खेल भावना के खिलाफ है।
आज के डिजिटल युग में कोई भी तस्वीर काटकर, क्रॉप करके या गलत संदर्भ में डालकर फेक दावा बना सकता है। इसलिए हर फैन को चाहिए कि वह किसी भी वायरल पोस्ट पर विश्वास करने से पहले फैक्ट-चेक जरूर करे।
सच्चाई यह है…
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जेमिमा रोड्रिग्स का LBW अपील सही तरीके से नॉट आउट दिया गया था।
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DRS फुटेज में कोई गड़बड़ी या एडिटिंग नहीं की गई।
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सोशल मीडिया पर चल रही तस्वीरें दो अलग-अलग क्षणों की थीं, न कि “एडिटेड वीडियो” की।
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आधिकारिक स्रोतों ने इस दावे को पूरी तरह झूठा बताया।
निष्कर्ष: जेमिमा ने जीता, फेक न्यूज हारी
जेमिमा रोड्रिग्स ने अपनी शानदार पारी से भारत को जीत दिलाई। उनकी बल्लेबाजी, संयम और आत्मविश्वास ने साबित किया कि असली जवाब बल्ले से दिया जाता है, ट्वीट्स से नहीं। वायरल DRS दावा पूरी तरह मनगढ़ंत था। खेल पत्रकारिता का मकसद खिलाड़ियों को बदनाम करना नहीं, बल्कि सत्य दिखाना होना चाहिए। भारत अब फाइनल में दक्षिण अफ्रीका से भिड़ेगा, और फैंस उम्मीद कर रहे हैं कि जेमिमा का बल्ला एक बार फिर बोलेगा।
