7 सितंबर चंद्रग्रहण 2025 भारत समेत पूरी दुनिया में एक बड़ा खगोलीय आयोजन होगा। इस दिन आसमान में खूबसूरत ब्लड मून दिखाई देगा। धार्मिक दृष्टिकोण से ग्रहण को अशुभ माना गया है, खासकर जब बात गर्भवती महिलाओं और बच्चों की हो। ग्रहण से पहले और उसके दौरान लगने वाला सूतक काल इस समय को और भी खास बना देता है।
इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि चंद्रग्रहण 2025 पर सूतक काल क्या होता है, गर्भवती महिलाओं और बच्चों को किन नियमों का पालन करना चाहिए और इस समय क्या सावधानियां जरूरी हैं।

चंद्रग्रहण 2025 और सूतक काल क्या है?
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चंद्रग्रहण 2025 की शुरुआत 7 सितंबर रात 9:58 बजे होगी और 8 सितंबर सुबह 2:25 बजे समाप्त होगी।
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धार्मिक मान्यता के अनुसार, ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है।
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यानी सूतक काल 7 सितंबर दोपहर 12:57 बजे से शुरू होकर 8 सितंबर रात 2:25 बजे तक चलेगा।
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इस अवधि में भोजन, पूजा-पाठ और शुभ कार्यों से बचने की परंपरा है।
सूतक काल का असर गर्भवती महिलाओं पर
गर्भवती महिलाएं चंद्रग्रहण 2025 में सबसे ज्यादा सावधानी रखें। धार्मिक मान्यताओं में कहा गया है कि इस दौरान की गई लापरवाही गर्भस्थ शिशु को प्रभावित कर सकती है।
गर्भवती महिलाओं के लिए नियम
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चाकू, कैंची, सुई का प्रयोग न करें – माना जाता है कि इससे गर्भस्थ शिशु पर निशान पड़ सकता है।
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घर से बाहर न निकलें – चंद्रग्रहण 2025 की रोशनी गर्भवती महिला के लिए हानिकारक मानी जाती है।
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मंत्र-जप और ध्यान करें – सूतक काल में गर्भवती महिलाएं शांत वातावरण में प्रार्थना करें।
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पेट पर कपड़ा रखें – कुछ परंपराओं के अनुसार पेट पर कपड़ा या तुलसी की पत्ती रखने से नकारात्मक असर नहीं पड़ता।
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ग्रहण के बाद स्नान करें – स्नान के बाद स्वच्छ कपड़े पहनें और भगवान का ध्यान करें।
सूतक काल का असर बच्चों पर
छोटे बच्चे भी ग्रहण के समय प्रभावित हो सकते हैं। इस वजह से माता-पिता को खास सतर्क रहना चाहिए।
बच्चों के लिए नियम
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बच्चों को घर से बाहर न निकालें – चंद्रग्रहण 2025 के दौरान बच्चों को चंद्रमा की सीधी रोशनी से बचाएं।
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भोजन से परहेज करें – सूतक काल और ग्रहण के दौरान बच्चों को भोजन न दें।
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तुलसी का प्रयोग करें – दूध या पानी में तुलसी की पत्ती डालकर बच्चों को पिलाना शुभ माना जाता है।
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ग्रहण के बाद स्नान कराएं – बच्चों को स्नान कराएं और गंगाजल से शुद्धिकरण करें।
चंद्रग्रहण 2025: सूतक काल में क्या करें और क्या न करें?
क्या करें?
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घर में तुलसी पत्तियां रखें।
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मंत्र-जप, ध्यान और प्रार्थना करें।
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ग्रहण खत्म होने के बाद स्नान करें।
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दान और गंगाजल छिड़कना शुभ माना गया है।
क्या न करें?
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सूतक काल और ग्रहण के दौरान भोजन न करें।
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गर्भवती महिलाएं तेज धार वाले उपकरणों का प्रयोग न करें।
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बच्चों को बाहर न निकलने दें।
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शुभ कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश या पूजा न करें।
चंद्रग्रहण 2025 और सूतक काल: वैज्ञानिक दृष्टिकोण
धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी सावधानी जरूरी है।
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ग्रहण के दौरान सूर्य और चंद्रमा की रोशनी पर असर पड़ता है, जिससे वातावरण में हल्का परिवर्तन होता है।
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गर्भवती महिलाओं पर मानसिक तनाव और चिंता का असर बढ़ सकता है।
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बच्चों को सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण में रखना स्वास्थ्य की दृष्टि से सही है।
गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए 5 जरूरी सावधानियां (चंद्रग्रहण 2025)
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ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाएं आराम करें और बच्चों को सुरक्षित रखें।
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सूतक काल में पूजा-पाठ से बचें और ग्रहण समाप्ति पर ही करें।
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खाने-पीने की चीजों में तुलसी की पत्तियां डालकर रखें।
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ग्रहण खत्म होने के बाद स्नान और गंगाजल का छिड़काव करें।
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दान और प्रार्थना करना ग्रहण के बाद अत्यंत शुभ माना जाता है।
निष्कर्ष
7 सितंबर चंद्रग्रहण 2025 खगोलीय दृष्टि से तो एक अद्भुत नजारा होगा, लेकिन धार्मिक परंपराओं के अनुसार इस दौरान गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए सावधानियां जरूरी हैं। सूतक काल में नियमों का पालन करके हम अपने स्वास्थ्य और मानसिक शांति दोनों को सुरक्षित रख सकते हैं।
चाहे आप धार्मिक मान्यता में विश्वास करते हों या वैज्ञानिक दृष्टिकोण में, गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए यह सावधानियां लाभकारी हैं। इसलिए 7 सितंबर का यह ग्रहण आपके परिवार के लिए सुरक्षित और मंगलमय रहे, यही सबसे बड़ा नियम है।
FAQ
Q1. 7 सितंबर 2025 का चंद्रग्रहण भारत में कब दिखाई देगा?
👉 यह ग्रहण रात 9:58 बजे शुरू होगा और 8 सितंबर सुबह 2:25 बजे खत्म होगा।
Q2. चंद्रग्रहण पर सूतक काल कब से शुरू होगा?
👉 सूतक काल ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले यानी दोपहर 12:57 बजे से प्रभावी होगा।
Q3. गर्भवती महिलाओं को चंद्रग्रहण में क्या नहीं करना चाहिए?
👉 गर्भवती महिलाओं को कैंची, सुई, चाकू का प्रयोग नहीं करना चाहिए, बाहर नहीं निकलना चाहिए और भोजन से परहेज करना चाहिए।
Q4. बच्चों के लिए सूतक काल में क्या नियम हैं?
👉 बच्चों को ग्रहण के समय बाहर नहीं ले जाना चाहिए, भोजन नहीं कराना चाहिए और ग्रहण बाद स्नान व गंगाजल से शुद्धि करनी चाहिए।
Q5. क्या वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी चंद्रग्रहण में सावधानी रखनी चाहिए?
👉 हाँ, ग्रहण के दौरान रोशनी और वातावरण में बदलाव आते हैं, जिससे गर्भवती महिलाओं और बच्चों पर मानसिक और शारीरिक प्रभाव हो सकता है।
