बिहार चुनाव 2025: एनडीए के बीच सीट बंटवारे का हुआ एलान

बिहार की सियासत में इस वक्त हलचल तेज है। जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नज़दीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे सभी दल अपनी रणनीति और तैयारी में जुट गए हैं। एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) ने आखिरकार लंबे इंतजार के बाद सीट बंटवारे का ऐलान कर दिया है। इस फैसले से बिहार की राजनीति में एक नई तस्वीर उभरकर सामने आई है।
एनडीए के घटक दलों — भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), जनता दल यूनाइटेड (जदयू), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) और राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (रालोजपा) — के बीच हुई बैठक में यह फैसला लिया गया। कई दौर की बातचीत और मतभेदों के बाद आखिरकार एक सहमति बनी और सीटों का बंटवारा तय हो गया।
🔹 सीट बंटवारे का फॉर्मूला तय
सूत्रों के मुताबिक, बिहार की कुल 243 विधानसभा सीटों में से भाजपा को 121 सीटें, जदयू को 110 सीटें, हम को 7 सीटें और रालोजपा को 5 सीटें दी गई हैं।
हालांकि आधिकारिक रूप से कुछ सीटों को लेकर अभी भी बातचीत जारी है, लेकिन लगभग यही फॉर्मूला तय माना जा रहा है।
इस समझौते में यह भी तय किया गया है कि अगर कोई सीट किसी घटक दल की पारंपरिक रही है, तो वहां उसी दल के उम्मीदवार को प्राथमिकता दी जाएगी। इस तरह, कई पुराने विवादित इलाकों में इस बार विवाद कम हुआ है।
🔹 सीट बंटवारे के साथ ही शुरू हुआ प्रचार अभियान
सीटों का बंटवारा होते ही एनडीए के सभी दलों ने अपने-अपने प्रत्याशियों की सूची तैयार करनी शुरू कर दी है। भाजपा ने तो कई क्षेत्रों में पहले से ही सर्वे करा रखा था कि कौन उम्मीदवार सबसे मज़बूत है।
जदयू की ओर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि “एनडीए एकजुट है और बिहार की जनता विकास चाहती है, न कि झगड़ा।”
भाजपा की तरफ से संजय जायसवाल ने बयान दिया कि “यह सीट बंटवारा सम्मानजनक और संतुलित है। हमारा उद्देश्य चुनाव जीतना नहीं, बल्कि बिहार को आगे बढ़ाना है।”
🔹 छोटे दलों को भी मिली अहमियत
इस बार सीट बंटवारे में छोटे सहयोगी दलों को भी सम्मानजनक जगह दी गई है।
हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के प्रमुख जीतन राम मांझी ने कहा कि उन्हें जो सीटें मिली हैं, वह उनके लिए संतोषजनक हैं।
वहीं, रालोजपा के पशुपति कुमार पारस ने भी कहा कि एनडीए का यह निर्णय बिहार की जनता के लिए शुभ संकेत है।
पिछले चुनाव में इन दलों के बीच मतभेदों के कारण कई सीटें हाथ से निकल गई थीं। लेकिन इस बार एनडीए ने पहले ही समन्वय बनाकर एकजुटता दिखाने की कोशिश की है।
🔹 विपक्ष पर निशाना
बिहार चुनाव 2025: एनडीए के बीच सीट बंटवारे का हुआ एलान
सीट बंटवारे के ऐलान के बाद एनडीए के नेताओं ने महागठबंधन पर भी तंज कसा।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा, “महागठबंधन में हर नेता खुद को मुख्यमंत्री बनाना चाहता है, जबकि एनडीए में एक ही चेहरा है – नीतीश कुमार।”
जदयू के वरिष्ठ नेता एलसीपी सिंह ने कहा कि “विपक्ष का एजेंडा सिर्फ विरोध है, जबकि हमारा एजेंडा विकास है।”
दूसरी ओर, महागठबंधन के नेताओं ने इस बंटवारे को “निराशाजनक” बताया और कहा कि एनडीए के पास कोई नया चेहरा या नई नीति नहीं है।
🔹 विकास बनाम जातीय समीकरण
बिहार की राजनीति में जातीय समीकरण हमेशा अहम भूमिका निभाते हैं। एनडीए इस बार इन समीकरणों को ध्यान में रखकर ही सीटें बाँटने की कोशिश की है।
भाजपा ने जहां शहरी और अति पिछड़े वर्ग के क्षेत्रों पर ध्यान दिया है, वहीं जदयू ने ग्रामीण और पिछड़े वर्ग की सीटों पर अपनी पकड़ बनाए रखने की रणनीति अपनाई है।
विशेष रूप से, मगध, सीवान, भोजपुर और मधुबनी इलाकों में सीट बंटवारे के बाद गठबंधन के भीतर तालमेल बेहतर दिख रहा है।
🔹 नीतीश कुमार का फोकस – “सात निश्चय पार्ट-2”
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि चुनाव में एनडीए का मुख्य मुद्दा विकास होगा।
उन्होंने अपनी “सात निश्चय पार्ट-2” योजना को दोहराया और कहा कि हर गांव में शिक्षा, सड़क, बिजली, रोजगार और महिला सशक्तिकरण उनकी प्राथमिकता में रहेगा।
भाजपा ने भी घोषणा की है कि केंद्र की योजनाओं को बिहार में तेजी से लागू किया जाएगा, ताकि राज्य की अर्थव्यवस्था और मजबूत हो सके।
🔹 एनडीए की एकजुटता का संदेश
लंबे समय से चल रहे अंदरूनी खींचतान के बाद इस सीट बंटवारे ने एनडीए को एकजुटता का नया संदेश दिया है।
भाजपा और जदयू के बीच पहले कुछ सीटों को लेकर मतभेद थे, लेकिन अब दोनों दलों ने “सेटिंग” के ज़रिए उन विवादों को सुलझा लिया है।
नीतीश कुमार और भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने इस समझौते को “जनता के हित में ऐतिहासिक निर्णय” बताया।
🔹 जनता की प्रतिक्रिया
बिहार के कई जिलों में एनडीए के समर्थकों ने इस फैसले का स्वागत किया है।
लोगों का कहना है कि अब जब सीट बंटवारा हो गया है, तो प्रत्याशियों के नाम जल्दी घोषित होने चाहिए ताकि जनता को समझने का मौका मिले कि कौन उम्मीदवार उनके बीच काम करेगा।
वहीं कुछ जगहों पर यह भी चर्चा है कि कुछ पुराने विधायकों के टिकट कट सकते हैं, जिससे अंदरूनी असंतोष भी पैदा हो सकता है।
लेकिन एनडीए का दावा है कि “हर फैसले में संगठन और जीत दोनों को ध्यान में रखा गया है।”
🔹 चुनावी मैदान सजने को तैयार
अब जब सीट बंटवारा तय हो गया है, तो बिहार का चुनावी माहौल पूरी तरह गर्म हो गया है।
एनडीए के कार्यकर्ता मैदान में उतर चुके हैं, तो महागठबंधन भी अपने उम्मीदवारों की घोषणा करने की तैयारी में है।
ग्रामीण इलाकों में प्रचार अभियान की शुरुआत हो चुकी है। पोस्टर-बैनर, रैली और सोशल मीडिया पर दोनों गठबंधन आमने-सामने हैं।
🔹 निष्कर्ष
बिहार में एनडीए के बीच सीट बंटवारे का यह ऐलान चुनावी मौसम की सबसे बड़ी खबर है।
यह न सिर्फ गठबंधन की मजबूती दिखाता है, बल्कि यह भी बताता है कि एनडीए इस बार पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरने वाला है।
अब देखना यह होगा कि जनता किस पर भरोसा जताती है — क्या एनडीए की विकास की नीति फिर से बिहार में सरकार बनाएगी, या महागठबंधन कोई नया समीकरण बनाकर जनता का दिल जीत लेगा।
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