2025 बिहार विधानसभा चुनाव: 122 सीटों के लिए नाम वापसी खत्म | NDA और महागठबंधन में सीधी टक्कर

2025 बिहार विधानसभा चुनाव: 122 सीटों के लिए नाम वापसी खत्म | NDA और महागठबंधन में सीधी टक्कर

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2025 बिहार विधानसभा चुनाव: 122 सीटों के लिए नाम वापसी खत्म | NDA और महागठबंधन में सीधी टक्कर

2025 बिहार विधानसभा चुनाव: 122 सीटों के लिए नाम वापसी खत्म | NDA और महागठबंधन में सीधी टक्कर

2025 के बिहार विधानसभा चुनाव का माहौल अब अपने पूरे चरम पर है। दूसरे और अंतिम चरण के लिए नाम वापस लेने की आख़िरी तारीख़ आज खत्म हो गई। इस चरण में कुल 122 विधानसभा सीटों पर मतदान होगा, जो राज्य के 20 जिलों में 11 नवंबर को आयोजित किया जाएगा।

नाम वापसी की आख़िरी तारीख़ पूरी होते ही अब यह साफ हो गया है कि किन-किन उम्मीदवारों के बीच असली मुकाबला होगा। इस बीच, महागठबंधन (RJD, कांग्रेस, VIP, CPI(ML)) की तरफ से कई उम्मीदवारों ने अपने नाम वापस ले लिए हैं, ताकि सीटों पर आपसी तालमेल बना रहे और वोटों का बिखराव न हो।

महागठबंधन में नाम वापसी से बढ़ी रणनीतिक मजबूती

मधुबनी जिले की बाबूबरही सीट से विकासशील इंसान पार्टी (VIP) की उम्मीदवार बिंदु गुलाब यादव ने अपना नाम वापस ले लिया। उन्होंने यह निर्णय राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के उम्मीदवार के समर्थन में लिया। इसी तरह, नवादा जिले की वरिसलीगंज सीट से कांग्रेस उम्मीदवार सतीश कुमार मंतन ने भी नामांकन वापस ले लिया और RJD की अनीता देवी को समर्थन दिया। https://www.eci.gov.in/

कटिहार जिले की प्राणपुर सीट से कांग्रेस उम्मीदवार तौकीर आलम ने भी RJD की इश्रत परवीन के पक्ष में नामांकन वापस लेकर महागठबंधन की एकता को मज़बूत किया। यह स्पष्ट है कि महागठबंधन अपने भीतर के मतभेदों को दूर कर अब एकजुट होकर चुनाव मैदान में उतर रहा है।

NDA ने तेज़ की प्रचार रफ़्तार

दूसरी ओर, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने पहले चरण की सीटों पर प्रचार अभियान को और भी तेज़ कर दिया है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (JDU) ने सारण जिले की दरियापुर, मेकर, और मांझी विधानसभा सीटों के साथ-साथ वैशाली जिले के पातेपुर में जनसभाएं कीं। अपने भाषणों में उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने बिहार में कानून का राज स्थापित किया है और विकास के रास्ते को तेज़ किया है।

नीतीश कुमार ने यह भी आरोप लगाया कि RJD-कांग्रेस के शासनकाल में कानून व्यवस्था की स्थिति बहुत खराब थी और अपराधी बेलगाम घूमते थे। उन्होंने कहा, “हमने बिहार को अराजकता से निकालकर विकास के रास्ते पर लाया है।”

बीजेपी अध्यक्ष जे.पी. नड्डा का हमला

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने भी औरंगाबाद और वैशाली जिले में NDA उम्मीदवारों के समर्थन में कई जनसभाएं कीं।
पातेपुर में आयोजित सभा में उन्होंने कहा कि NDA सरकार ने बिहार को मुख्यधारा के विकास से जोड़ा है। उन्होंने तेजस्वी यादव पर हमला करते हुए कहा,

“तेजस्वी यादव के मुंह से विकास की बात शोभा नहीं देती, क्योंकि लालू-राबड़ी राज के दौरान बिहार ने सिर्फ़ भय और भ्रष्टाचार देखा था।”

नड्डा ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बिहार ने सड़क, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में तेज़ प्रगति की है।

चिराग पासवान का दावा – “NDA ही बिहार की पहचान”

2025 बिहार विधानसभा चुनाव: 122 सीटों के लिए नाम वापसी खत्म | NDA और महागठबंधन में सीधी टक्कर

लोजपा (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने सिवान जिले के दरौली में जनसभा की और जनता से NDA को वोट देने की अपील की। उन्होंने कहा कि NDA ही वह गठबंधन है जिसने बिहार को अंधकार से उजाले की ओर बढ़ाया है।

तेजस्वी यादव का जवाब – “जनसेवा मेरा जुनून है”

महागठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी प्रसाद यादव ने चुनावी सभाओं में कहा कि बिहार की जनता बदलाव चाहती है। उन्होंने कहा,

“जनसेवा मेरा जुनून है। मैंने बिहार के विकास के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार किया है। युवाओं को रोजगार देना, किसानों की आय बढ़ाना और शिक्षा व्यवस्था सुधारना हमारी प्राथमिकता है।”

तेजस्वी ने NDA पर हमला करते हुए कहा कि पिछले 15 वर्षों में राज्य में बेरोज़गारी, पलायन और महंगाई ने लोगों की कमर तोड़ दी है। उन्होंने वादा किया कि अगर उनकी सरकार बनती है, तो वे हर जिले में औद्योगिक विकास और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सुनिश्चित करेंगे।

कांग्रेस का भरोसा – “इस बार वापसी तय”

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व राजस्थान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी बिहार में चुनावी रैली को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि पिछली बार महागठबंधन बहुत कम अंतर से सत्ता से बाहर रह गया था, लेकिन इस बार जनता बदलाव के मूड में है।
गहलोत ने कहा कि महागठबंधन की सरकार बनने पर महिलाओं की सुरक्षा, युवाओं के रोजगार और शिक्षा के ढांचे को मज़बूती दी जाएगी।

प्रशांत किशोर की एंट्री से चुनाव में नया मोड़

जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) ने भी इस बार के चुनाव में सक्रिय भूमिका निभाई है। उन्होंने गोपालगंज जिले में जनसभाएं कीं और जनता से कहा कि अब बिहार को “नया रास्ता” चुनना होगा।
उन्होंने कहा,

“हमने 30 साल तक दो ही तरह की राजनीति देखी — एक जाति की और दूसरी सत्ता की। अब समय है जनता की राजनीति का।”

PK की जनसभाओं में भीड़ उमड़ रही है, जिससे यह साफ है कि वे तीसरे मोर्चे के रूप में राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं।

11 नवंबर को होगा निर्णायक मतदान

अब चुनावी रणभूमि पूरी तरह तैयार है। दूसरे चरण की 122 सीटों पर मुकाबला अब तीन प्रमुख मोर्चों के बीच होगा —

  1. NDA (JDU + BJP + LJP-Ram Vilas)

  2. महागठबंधन (RJD + कांग्रेस + VIP + वाम दल)

  3. जनसुराज पार्टी (प्रशांत किशोर)

11 नवंबर को होने वाला यह मतदान बिहार की राजनीति की दिशा तय करेगा। एक ओर NDA विकास और स्थिरता का दावा कर रहा है, वहीं महागठबंधन बदलाव और नए रोजगार के अवसरों की बात कर रहा है। तीसरी ओर, प्रशांत किशोर जनता के लिए एक नया विकल्प पेश कर रहे हैं।

FAQs :

Q1. 2025 बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में कितनी सीटों पर मतदान होगा?
👉 दूसरे और अंतिम चरण में कुल 122 सीटों पर मतदान 11 नवंबर को होगा।

Q2. नामांकन वापसी की अंतिम तारीख कब थी?
👉 नामांकन वापसी की आखिरी तारीख 23 अक्टूबर 2025 थी, जिसके बाद उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी हुई।

Q3. महागठबंधन की ओर से किन उम्मीदवारों ने नाम वापस लिया?
👉 बाबूबरही सीट से बिंदु गुलाब यादव (VIP), वरिसलीगंज से सतीश कुमार मंतन (कांग्रेस) और प्राणपुर से तौकीर आलम (कांग्रेस) ने नाम वापस लिया।

Q4. NDA की ओर से किन नेताओं ने प्रचार किया?
👉 मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (JDU), भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, और लोजपा (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने कई जिलों में रैलियां कीं।

Q5. प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी की भूमिका क्या है?
👉 प्रशांत किशोर ने गोपालगंज में जनसभाएं कीं और कहा कि अब बिहार को “नई राजनीति” की जरूरत है। उनकी पार्टी तीसरा मोर्चा बनकर चुनावी समीकरण बदल सकती है।

Q6. मतदान की तारीख क्या है?
👉 दूसरे चरण का मतदान 11 नवंबर 2025 को 20 जिलों में होगा।

नतीजे तय करेंगे बिहार की नई कहानी

नामांकन वापसी के बाद अब उम्मीदवारों की अंतिम सूची सामने आ चुकी है, और हर दल अपने पूरे दमखम से चुनावी मैदान में उतर चुका है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार का चुनाव बहुत रोचक होने वाला है। युवाओं, महिलाओं और पहली बार वोट डालने वालों की भूमिका निर्णायक मानी जा रही है।

अब सबकी नज़रें 11 नवंबर पर हैं, जब बिहार की जनता यह तय करेगी कि आने वाले पांच सालों तक राज्य की बागडोर किसके हाथ में होगी —
विकास के नाम पर NDA, बदलाव के नाम पर महागठबंधन, या नए रास्ते की तलाश में जनसुराज पार्टी?

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