बिहार चुनाव 2025 धीरे-धीरे नजदीक आ रहा है और राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ चुकी है। सत्ता में बने रहने की कोशिश कर रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और सत्ता में वापसी की उम्मीद लगाए तेजस्वी यादव दोनों ही इस बार अपनी-अपनी रणनीति पर काम कर रहे हैं।
यह चुनाव केवल दो नेताओं या दो पार्टियों का नहीं बल्कि गठबंधन राजनीति और मुद्दों की जंग का चुनाव होने वाला है।

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बिहार चुनाव 2025 में कौन-कौन सी पार्टियां मैदान में हैं
बिहार की राजनीति हमेशा से बहुदलीय रही है। इस बार भी कई प्रमुख पार्टियां मैदान में उतरने जा रही हैं। आइए जानते हैं प्रमुख दलों के बारे में —
1. जनता दल (यूनाइटेड) – JDU
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू (JDU) अब भी बिहार की राजनीति में अहम भूमिका निभा रही है।
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फिलहाल नीतीश कुमार एनडीए गठबंधन का हिस्सा हैं।
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2020 के बाद कई बार उन्होंने पाला बदला — पहले एनडीए छोड़ा, फिर इंडिया गठबंधन (I.N.D.I.A) में शामिल हुए और फिर दोबारा एनडीए में लौट आए।
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2025 के चुनाव में जदयू भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ सकती है।
2. भारतीय जनता पार्टी – BJP
भाजपा (BJP) बिहार में अपने संगठन और मतदाता आधार को लेकर मजबूत है।
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पार्टी का फोकस हिंदुत्व, विकास और केंद्र की योजनाओं पर रहेगा।
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भाजपा का लक्ष्य है कि 2025 में वह मुख्यमंत्री पद के लिए निर्णायक भूमिका निभाए।
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भाजपा नीतीश कुमार के साथ गठबंधन में है लेकिन सीटों को लेकर अंदरूनी खींचतान जारी है।
3. राष्ट्रीय जनता दल – RJD
तेजस्वी यादव की पार्टी राजद (RJD) विपक्ष की सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है।
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राजद का फोकस नौकरी, बेरोजगारी, और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर है।
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तेजस्वी यादव युवाओं और पिछड़े वर्ग के वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रहे हैं।
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पार्टी इंडिया गठबंधन का मुख्य स्तंभ है।
4. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस – Congress
कांग्रेस पार्टी बिहार में कमजोर जरूर है लेकिन अभी भी उसका एक स्थायी वोट बैंक है।
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कांग्रेस इंडिया गठबंधन में राजद के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी।
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पार्टी का फोकस महंगाई, बेरोजगारी, और महिला सुरक्षा जैसे राष्ट्रीय मुद्दों पर रहेगा।
5. लोक जनशक्ति पार्टी (LJP – रामविलास)
चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) इस बार एक स्वतंत्र और आक्रामक भूमिका में दिख रही है।
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वे खुद को “बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट” का चेहरा बता रहे हैं।
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भाजपा के साथ तालमेल संभव है लेकिन सीट शेयरिंग पर फैसला चुनाव के नजदीक होगा।
6.हम पार्टी (हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा)
जीतन राम मांझी की पार्टी हम (HAM) भी एनडीए में शामिल है।
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मांझी दलित और अति पिछड़े वर्ग के वोट को साधने की कोशिश करेंगे।
7. अन्य क्षेत्रीय दल
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वीआईपी पार्टी (मुकेश सहनी)
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एआईएमआईएम (असदुद्दीन ओवैसी)
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सीपीआई, सीपीएम और वाम दल – ये दल इंडिया गठबंधन के सहयोगी होंगे।
बिहार चुनाव 2025 में गठबंधन कैसे बने हैं
बिहार की राजनीति का सबसे बड़ा पहलू है “गठबंधन”। यहाँ बिना गठबंधन कोई चुनाव जीतना लगभग असंभव है। 2025 में दो प्रमुख गठबंधन आमने-सामने होंगे।
एनडीए गठबंधन (NDA Alliance)
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मुख्य पार्टियां: भाजपा, जदयू, हम, लोजपा (रामविलास)
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मुख्यमंत्री चेहरा: नीतीश कुमार
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मुख्य नारे: “विकास ही विश्वास”, “डबल इंजन की सरकार”
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रणनीति: केंद्र और राज्य की योजनाओं के प्रचार के साथ मोदी फैक्टर का उपयोग।
इंडिया गठबंधन (INDIA Alliance)
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मुख्य पार्टियां: राजद, कांग्रेस, वाम दल (CPI, CPM, CPI-ML)
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मुख्यमंत्री चेहरा: तेजस्वी यादव
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मुख्य नारे: “न्याय का हक, युवाओं का रोजगार”
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रणनीति: बेरोजगारी, शिक्षा, और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को उठाकर जनता से जुड़ाव बनाना।
बिहार चुनाव 2025 किन मुद्दों पर लड़ा जाएगा
अब सवाल है कि बिहार चुनाव 2025 के मुख्य मुद्दे क्या होंगे?
नीचे कुछ प्रमुख मुद्दे दिए गए हैं जिन पर पूरा चुनाव केंद्रित रहेगा।
1. रोजगार और बेरोजगारी
बिहार में युवाओं के लिए रोजगार सबसे बड़ा मुद्दा रहेगा।
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लाखों युवा हर साल राज्य से बाहर पलायन करते हैं।
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तेजस्वी यादव इस मुद्दे को अपना मुख्य चुनावी हथियार बना चुके हैं।
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वहीं भाजपा और जदयू “औद्योगिक निवेश और सरकारी योजनाओं से रोजगार” पर जोर देंगे।
2. विकास और बुनियादी ढांचा
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सड़कों, बिजली, पानी, और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर मतदाता सरकार से जवाब मांगेंगे।
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नीतीश कुमार “सात निश्चय योजना” को अपनी उपलब्धि के रूप में पेश करेंगे।
3. शिक्षा और स्कूल व्यवस्था
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सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता, शिक्षक भर्ती और युवाओं का पलायन प्रमुख मुद्दा रहेगा।
4. जातीय समीकरण और सामाजिक न्याय
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बिहार की राजनीति जाति आधारित है। यादव, कुर्मी, दलित और ब्राह्मण वोट बैंक पर सभी की नजरें हैं।
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राजद सामाजिक न्याय की बात करेगा, जबकि भाजपा “सबका साथ, सबका विकास” का नारा दोहराएगी।
5. महंगाई और भ्रष्टाचार
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कांग्रेस और राजद इस मुद्दे को लगातार उठाते रहे हैं।
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एनडीए महंगाई को वैश्विक मुद्दा बताते हुए राहत योजनाओं का हवाला देगा।
6. महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण
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बिहार में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है।
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एनडीए महिला सशक्तिकरण योजनाओं को गिनाएगा जबकि विपक्ष कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाएगा।
बिहार चुनाव 2025: मतदाताओं की भूमिका
बिहार का मतदाता आज पहले से ज्यादा जागरूक है।
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युवा मतदाता पहली बार वोट डालने जा रहे हैं।
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सोशल मीडिया का असर भी इस बार चुनाव प्रचार में अहम रहेगा।
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लोग अब जाति से ज्यादा विकास और रोजगार पर ध्यान दे रहे हैं।
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बिहार चुनाव 2025 की संभावित तारीखें
हालांकि अभी तक निर्वाचन आयोग ने आधिकारिक तारीखें घोषित नहीं की हैं, लेकिन माना जा रहा है कि अक्टूबर–नवंबर 2025 में बिहार विधानसभा चुनाव होंगे।
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कुल 243 विधानसभा सीटों पर वोटिंग होगी।
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लगभग 7 करोड़ से अधिक मतदाता अपने अधिकार का प्रयोग करेंगे।
बिहार चुनाव 2025 में सोशल मीडिया की भूमिका
इस बार का चुनाव डिजिटल युद्ध का रूप ले चुका है।
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भाजपा और राजद दोनों के पास मजबूत सोशल मीडिया टीमें हैं।
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फेसबुक, व्हाट्सएप, और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर प्रचार अभियान पहले से शुरू हो चुका है।
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युवाओं को लुभाने के लिए हर पार्टी “डिजिटल बिहार” की बात कर रही है।
निष्कर्ष (Conclusion)
बिहार चुनाव 2025 सिर्फ सत्ता परिवर्तन का चुनाव नहीं बल्कि यह तय करेगा कि राज्य का भविष्य किस दिशा में जाएगा।
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एक तरफ नीतीश कुमार और भाजपा का गठबंधन है जो विकास की बात कर रहा है।
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दूसरी ओर तेजस्वी यादव और राजद-कांग्रेस का गठबंधन है जो रोजगार और सामाजिक न्याय को मुद्दा बना रहा है।
अंततः जनता ही तय करेगी कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन बनेगा और किस दिशा में बिहार आगे बढ़ेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. बिहार चुनाव 2025 कब होंगे?
संभावना है कि बिहार विधानसभा चुनाव अक्टूबर–नवंबर 2025 में होंगे।
2. बिहार चुनाव 2025 में कौन-कौन सी पार्टियां लड़ेंगी?
मुख्य रूप से भाजपा, जदयू, राजद, कांग्रेस, लोजपा, हम और वाम दल चुनाव लड़ेंगे।
3. बिहार चुनाव 2025 में कौन सा गठबंधन मजबूत है?
फिलहाल एनडीए और इंडिया गठबंधन दोनों ही बराबर टक्कर में हैं। नतीजा मतदाताओं के मूड पर निर्भर करेगा।
4. बिहार चुनाव 2025 का मुख्य मुद्दा क्या होगा?
मुख्य मुद्दे होंगे — रोजगार, विकास, शिक्षा, महंगाई और कानून व्यवस्था।
5. क्या नीतीश कुमार फिर से मुख्यमंत्री बन सकते हैं?
यह सीटों के समीकरण पर निर्भर करेगा। अगर एनडीए को बहुमत मिला तो नीतीश कुमार एक बार फिर मुख्यमंत्री बन सकते हैं।

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