वोटर लिस्ट रिवीजन 2.0: जानिए क्या है Election Commission का नया वोटर लिस्ट सफाई अभियान

वोटर लिस्ट रिवीजन 2.0: जानिए क्या है Election Commission का नया वोटर लिस्ट सफाई अभियान

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चुनाव आयोग का वोटर लिस्ट रिवीजन 2.0 — जानिए पूरी जानकारी

भारत में हर वोट की कीमत है। यही वजह है कि चुनाव आयोग (Election Commission) समय-समय पर यह सुनिश्चित करता है कि देश की वोटर लिस्ट पूरी तरह सटीक और अद्यतन रहे। इसी प्रयास के तहत आयोग ने दूसरे चरण की “Special Intensive Revision (SIR)” यानी वोटर लिस्ट सफाई अभियान 2.0 की शुरुआत कर दी है।

यह अभियान 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चलाया जा रहा है, जिसमें कुल 51 करोड़ मतदाता शामिल हैं। इसका उद्देश्य है – वोटर लिस्ट में गलत या दोहराए गए नाम हटाना और नए योग्य मतदाताओं को जोड़ना।

कब से कब तक चलेगा यह अभियान?

यह दूसरा चरण 4 नवंबर 2025 से शुरू होकर 7 फरवरी 2026 तक चलेगा।
इस दौरान:

  • 9 दिसंबर 2025 को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की जाएगी।

  • 7 फरवरी 2026 को अंतिम वोटर लिस्ट प्रकाशित की जाएगी।

पहला चरण बिहार में पूरा हो चुका है, जहाँ 7.42 करोड़ वोटरों की अंतिम लिस्ट 30 सितंबर को जारी की गई थी।

किन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में हो रहा है SIR 2.0?

इस चरण में कुल 12 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं:

  1. अंडमान और निकोबार द्वीप समूह

  2. लक्षद्वीप

  3. छत्तीसगढ़

  4. गोवा

  5. गुजरात

  6. केरल

  7. मध्य प्रदेश

  8. पुडुचेरी

  9. राजस्थान

  10. तमिलनाडु

  11. उत्तर प्रदेश

  12. पश्चिम बंगाल

क्या है SIR और क्यों होता है यह अभियान?

Special Intensive Revision (SIR) का मतलब है वोटर लिस्ट की विशेष गहन समीक्षा
इसका मुख्य उद्देश्य है –

  • नए पात्र वोटरों के नाम जोड़ना।

  • मृत या दो बार दर्ज नामों को हटाना।

  • ऐसे लोगों को निकालना जो किसी और राज्य या इलाके में चले गए हैं।

  • फर्जी और विदेशी नामों की पहचान करना।

सीधे शब्दों में कहें तो, यह एक “वोटर लिस्ट सफाई अभियान” है ताकि अगला चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी हो।

कैसे होगा यह काम?

प्रत्येक राज्य और जिले में BLO (Booth Level Officer) घर-घर जाकर या ऑनलाइन माध्यम से जांच करेंगे।
वे यह देखेंगे कि:

  • क्या आपका नाम लिस्ट में सही लिखा है?

  • क्या आपने हाल ही में पता बदला है?

  • क्या किसी मृत व्यक्ति का नाम अभी भी लिस्ट में है?

वोटर इन सुधारों के लिए Form 6, 7, 8, 8A के जरिए ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन कर सकते हैं।

राष्ट्रीय मतदाता सेवा पोर्टल (NVSP) और वोटर हेल्पलाइन ऐप से भी अपडेट किया जा सकता है।

किन राज्यों में जल्द चुनाव हैं?

इन राज्यों में SIR का खास महत्व इसलिए भी है क्योंकि कुछ में जल्द विधानसभा चुनाव होने वाले हैं।

  • बिहार में 6 नवंबर 2025 से चुनाव शुरू होंगे।

  • तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल और पश्चिम बंगाल में 2026 में विधानसभा चुनाव होंगे।

  • असम में भी 2026 में चुनाव हैं, लेकिन वहां नागरिकता सत्यापन की सुप्रीम कोर्ट निगरानी प्रक्रिया चल रही है, इसलिए वहां SIR अलग से किया जाएगा।

असम को अलग क्यों रखा गया?

असम में नागरिकता की जांच सुप्रीम कोर्ट के निर्देश में चल रही है, इसलिए वहां के लिए अलग तारीख और प्रक्रिया तय की जाएगी।
मुख्य चुनाव आयुक्त ग्यानेश कुमार ने कहा है कि “असम में नागरिकता अधिनियम के विशेष प्रावधान लागू हैं, इसलिए वहां SIR का अलग आदेश जारी होगा।”

क्यों जरूरी है वोटर लिस्ट की सफाई?

भारत में हर साल लाखों लोग नए 18 वर्ष के होते हैं, कई लोग शहर बदलते हैं या किसी कारण से गुजर जाते हैं।
अगर इन बदलावों को वोटर लिस्ट में अपडेट न किया जाए, तो चुनाव के समय:

  • फर्जी वोटिंग की संभावना बढ़ जाती है।

  • गलत पते पर वोटर कार्ड भेजा जा सकता है।

  • कई असली वोटरों के नाम गलती से हट सकते हैं।

इसलिए SIR जैसे अभियान न सिर्फ प्रशासनिक रूप से ज़रूरी हैं, बल्कि यह लोकतंत्र को मज़बूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं।

कैसे चेक करें कि आपका नाम लिस्ट में है या नहीं?

आप अपने मोबाइल से ही चेक कर सकते हैं कि आपका नाम वोटर लिस्ट में है या नहीं।
इसके लिए बस नीचे दिए गए तरीकों का उपयोग करें:

  1. NVSP पोर्टल पर जाएं: https://www.nvsp.in

  2. वोटर हेल्पलाइन ऐप डाउनलोड करें (Google Play या App Store से)।

  3. SMS भेजें:
     Type करें EPIC <आपका वोटर कार्ड नंबर> और भेजें 1950 पर।

आम जनता के लिए इसका क्या मतलब?

इस पूरे अभियान का मकसद है यह सुनिश्चित करना कि:

  • हर पात्र व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट में शामिल हो।

  • किसी का नाम गलती से न हटे।

  • कोई दो जगह से वोट न कर सके।

यह प्रक्रिया चुनावों को निष्पक्ष और भरोसेमंद बनाती है।
मतलब, आपका वोट ही आपकी ताकत है — इसलिए यह ज़रूरी है कि आपकी जानकारी सही हो।

पिछली बार कब हुआ था SIR?

पिछली बार SIR वर्ष 2002-2004 के बीच हुआ था। यानी लगभग 21 साल बाद यह अभियान फिर से इतने बड़े स्तर पर चलाया जा रहा है।
इस बार इसे और भी आधुनिक तकनीक और डिजिटल टूल्स की मदद से किया जा रहा है, ताकि डेटा में पारदर्शिता और सटीकता बनी रहे।

निष्कर्ष

भारत में लोकतंत्र की मजबूती केवल चुनावों से नहीं, बल्कि सटीक वोटर लिस्ट से भी तय होती है।
चुनाव आयोग का यह कदम न केवल पुराने रिकॉर्ड को सुधारने का मौका है, बल्कि यह हर नागरिक के लिए अपनी लोकतांत्रिक पहचान को सुनिश्चित करने का अवसर भी है।

तो अगर आपका नाम अब तक वोटर लिस्ट में नहीं है, या आपको कोई गलती दिखाई देती है, तो इस अभियान के दौरान तुरंत सुधार कराएँ।
क्योंकि — सही वोटर लिस्ट से ही बनता है सही लोकतंत्र।

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