भारत की महिला वर्ल्ड कप जीत: अगर समझदारी से खर्च हुआ पैसा, तो बदलेगा महिला क्रिकेट का विश्व क्रम

भारत की महिला वर्ल्ड कप जीत: अगर समझदारी से खर्च हुआ पैसा, तो बदलेगा महिला क्रिकेट का विश्व क्रम

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रविवार का दिन भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर के लिए बहुत लंबा और यादगार रहा। बारिश के कारण दो घंटे की देरी से शुरू हुआ मैच, आखिरकार रात के करीब 12 बजे खत्म हुआ जब उन्होंने कवर पर कैच लेकर दक्षिण अफ्रीका पर 52 रन से जीत दर्ज की और भारत को पहली बार महिला वर्ल्ड कप की ट्रॉफी दिलाई।

जैसे ही जीत मिली, स्टेडियम में आतिशबाज़ी फूटी, खिलाड़ियों की आंखों में आँसू थे, और पूरा डीवाई पाटिल स्टेडियम “भारत माता की जय” के नारों से गूंज उठा। हरमनप्रीत और उनकी टीम ने मैदान का चक्कर लगाया, दर्शकों का अभिवादन किया, और फिर मीडिया से बात करते हुए कहा –
“हम इस पल का बहुत समय से इंतज़ार कर रहे थे। जश्न तो पूरी रात चलेगा, लेकिन असली शुरुआत अब होगी। देखते हैं बीसीसीआई हमारे लिए क्या योजना बनाता है… यह बस शुरुआत है।”

उनके इस बयान में एक गहरा संदेश छिपा था – यह जीत सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं है, बल्कि भारत में महिलाओं के क्रिकेट के लिए एक नए युग की शुरुआत हो सकती है।

ऐतिहासिक जीत का महत्व

भारत अब तक महिला वर्ल्ड कप जीतने वाला पहला ग़ैर-पश्चिमी देश बन गया है। इससे पहले सिर्फ इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड ही ट्रॉफी जीत पाए थे। बीते 25 सालों में सिर्फ ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड ही लगातार वर्ल्ड कप जीतते आ रहे थे।

इस जीत से भारत ने साबित कर दिया कि अगर सही निवेश, ट्रेनिंग और सपोर्ट मिले, तो कोई भी टीम दुनिया की सर्वश्रेष्ठ बन सकती है। लेकिन अब ज़रूरत है कि इस सफलता को सिर्फ एक पल का उत्सव न बनाया जाए, बल्कि इसे एक लंबे बदलाव में बदला जाए।

ऑस्ट्रेलिया की सीख – जड़ से मज़बूती

ऑस्ट्रेलिया का महिला क्रिकेट में दबदबा किसी एक दिन में नहीं बना। 2015-16 में उन्होंने दुनिया की पहली महिला फ्रेंचाइज़ लीग Women’s Big Bash League (WBBL) शुरू की। इससे उन्हें गहराई वाला खिलाड़ी समूह मिला, जो आज भी बाकी दुनिया की तुलना में सबसे मज़बूत है।

भारत ने इसके जवाब में क्या किया?
बीसीसीआई ने 2023 तक सिर्फ एक तीन टीमों वाला T20 चैलेंज कराया — बस दिखावे के लिए।
अगर वाकई महिलाओं के क्रिकेट को गंभीरता से लिया जाता, तो शायद भारत बहुत पहले ही यह वर्ल्ड कप जीत सकता था।

समाज में महिलाओं की स्थिति और क्रिकेट

भारत एक क्रिकेट-प्रेमी देश है, लेकिन महिला क्रिकेट को लंबे समय तक नज़रअंदाज़ किया गया।
विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum) की रिपोर्ट के अनुसार, लैंगिक समानता के मामले में भारत अभी भी बहुत पीछे है — 148 देशों में भारत का स्थान 131वां है।

भारतीय क्रिकेट के फैसले लेने वाले ज़्यादातर लोग पुरुष हैं — ऐसे समाज से आते हैं जहाँ आज भी महिलाओं को “सिर्फ घर संभालने” के रूप में देखा जाता है। लेकिन अब यह सोच बदलने का समय है।

बीसीसीआई की जिम्मेदारी – सिर्फ इनाम नहीं, निवेश भी

बीसीसीआई ने वर्ल्ड कप जीत के बाद टीम इंडिया को 510 मिलियन रुपये (51 करोड़) का इनाम देने की घोषणा की है। साथ ही आईसीसी से मिलने वाले $4.5 मिलियन (करीब ₹37 करोड़) का प्राइज मनी भी जोड़ा जाएगा।

पर सवाल यह है — क्या इतना पैसा सिर्फ मौजूदा खिलाड़ियों में बांट देना ही काफी है?
जवाब है — नहीं।

अगर सच में महिला क्रिकेट को मजबूत बनाना है, तो यह पैसा गाँव-गाँव और स्कूल-स्कूल तक पहुंचना चाहिए।
हर छोटी लड़की को वही मौका मिलना चाहिए जो उसके भाई को मिलता है — बल्ला उठाने का, खेलने का और सपने देखने का।

भारत के करोड़ों घरों में बेटियाँ हैं जो क्रिकेट खेलना चाहती हैं, लेकिन मैदान, कोच या सुविधा नहीं मिलती।
अगर बीसीसीआई चाह ले, तो कुछ ही सालों में भारत ऐसी जगह बन सकता है जहाँ हर गली में लड़कियाँ क्रिकेट खेल रही होंगी — यही असली जीत होगी।

भारत की महिला वर्ल्ड कप जीत: अगर समझदारी से खर्च हुआ पैसा, तो बदलेगा महिला क्रिकेट का विश्व क्रम

क्रिकेट से समाज में बदलाव

वर्ल्ड कप की यह जीत सिर्फ खेल की नहीं है — यह सामाजिक बदलाव की शुरुआत भी हो सकती है।
आज स्मृति मंधाना के पोस्टर सड़कों पर लगे हैं, लेकिन अब उनके साथ जेमिमा रोड्रिग्स, दीप्ति शर्मा, और शफाली वर्मा भी होंगी। ये खिलाड़ी अलग-अलग धर्म और पृष्ठभूमि से आती हैं, लेकिन मैदान पर सिर्फ एक पहचान रखती हैं — भारतीय।

एक ऐसे समय में जब देश में समाज कई हिस्सों में बँटा हुआ है, महिला क्रिकेट टीम ने दिखाया कि एकता और मेहनत सबसे बड़ी ताकत है।

बाकी देशों का भविष्य

ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका जैसी टीमों के लिए यह हार अंत नहीं है।
ऑस्ट्रेलिया पहले भी हार के बाद और मज़बूत होकर लौटी है — 2017 में हारने के बाद उन्होंने लगातार तीन वर्ल्ड खिताब और कॉमनवेल्थ गोल्ड जीता।
दक्षिण अफ्रीका की कप्तान लौरा वोल्वार्ड्ट ने भी कहा, “हम लगातार फाइनल तक पहुँच रहे हैं, और एक दिन हम भी जीतेंगे।”

इसका मतलब है कि प्रतिस्पर्धा खत्म नहीं हुई, बल्कि अब महिला क्रिकेट में सच्ची वैश्विक प्रतिस्पर्धा शुरू हुई है — और इसमें भारत सबसे आगे है।

भारत की अगली राह

भारत की महिला वर्ल्ड कप जीत: अगर समझदारी से खर्च हुआ पैसा, तो बदलेगा महिला क्रिकेट का विश्व क्रम

हरमनप्रीत कौर और उनकी टीम ने यह साबित कर दिया है कि भारत अब किसी से पीछे नहीं।
जुलाई में इंग्लैंड दौरे पर टीम ने पहली बार T20 सीरीज़ जीती थी। तब राधा यादव ने कहा था –
“हम अब हर हाल में दबदबा बनाना चाहते हैं, कुछ बड़ा करना चाहते हैं।”

वर्ल्ड कप जीत से वह “कुछ बड़ा” शुरू हो चुका है।
लेकिन असली परीक्षा अब शुरू होगी — जब यह टीम आने वाले वर्षों में देशभर की लड़कियों के लिए प्रेरणा बनेगी, और जब बीसीसीआई इस ऊर्जा को ढांचे में बदलने का काम करेगा।

अगर भारत अपने पैसे और संसाधनों का सही इस्तेमाल करता है —
 बेहतर कोचिंग सुविधाएँ बनाता है
 ग्रामीण इलाकों में क्रिकेट अकादमियाँ खोलता है
 स्कूल स्तर पर लड़कियों के टूर्नामेंट शुरू करता है
 और खिलाड़ियों को समान वेतन व सम्मान देता है —

तो यह जीत सिर्फ एक वर्ल्ड कप तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह महिला क्रिकेट में नया विश्व क्रम (New World Order) तय करेगी।

निष्कर्ष

हरमनप्रीत कौर और उनकी टीम ने वह कर दिखाया जो दशकों से कोई भारतीय महिला टीम नहीं कर सकी थी। लेकिन अब असली चुनौती बीसीसीआई और समाज दोनों के सामने है —
क्या हम इस पल को इतिहास बनने देंगे, या इसे भविष्य बदलने का जरिया बनाएँगे?

अगर भारत ने इस जीत को समझदारी से आगे बढ़ाया, तो आने वाले समय में दुनिया कहेगी —
“महिला क्रिकेट का नया युग भारत से शुरू हुआ।”

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