मोदी सरकार का बड़ा तोहफा: 8वें वेतन आयोग की शर्तें मंजूर
केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए मंगलवार का दिन बड़ी राहत लेकर आया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल (Union Cabinet) की बैठक में 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) की Terms of Reference (ToR) को मंजूरी दे दी गई।

इस फैसले से लगभग 50 लाख केंद्रीय सरकारी कर्मचारी और 69 लाख सेवानिवृत्त पेंशनधारी सीधे तौर पर प्रभावित होंगे।
कब बनी 8वीं वेतन आयोग समिति?
जनवरी 2025 में सरकार ने आधिकारिक रूप से घोषणा की थी कि 8वां केंद्रीय वेतन आयोग गठित किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य है —
👉 केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और सेवा शर्तों की समीक्षा करना और
👉 भविष्य के लिए संतुलित वेतन संरचना (Pay Structure) की सिफारिश करना।
कौन करेंगे 8वें वेतन आयोग का नेतृत्व?
सरकार ने आयोग की संरचना (Composition) भी घोषित की है।
8वें वेतन आयोग की अध्यक्षता करेंगी —
➡️ पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन प्रकाश देसाई (Justice Ranjana Prakash Desai)।
साथ ही,
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प्रोफेसर पुलक घोष (IIM Bangalore) को पार्ट-टाइम सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है।
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पेट्रोलियम सचिव पंकज जैन आयोग के सदस्य सचिव (Member Secretary) होंगे।
8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट कब आएगी?
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि —
“आयोग को अपनी सिफारिशें 18 महीनों के भीतर देनी हैं। आवश्यकता पड़ने पर आयोग अंतरिम रिपोर्ट (Interim Report) भी प्रस्तुत कर सकता है।”
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि —
“नई वेतन संरचना संभवतः 1 जनवरी 2026 से लागू हो सकती है।”
8वें वेतन आयोग की मुख्य जिम्मेदारियां (Functions of 8th Pay Commission)
केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग के लिए कुछ प्रमुख बिंदु तय किए हैं, जिन पर यह अपनी सिफारिशें देगा।
1.देश की आर्थिक स्थिति और वित्तीय अनुशासन
आयोग देश की वर्तमान आर्थिक स्थिति और राजकोषीय अनुशासन (Fiscal Prudence) को ध्यान में रखेगा ताकि सरकारी खजाने पर बोझ न पड़े।
2.विकास और कल्याणकारी योजनाओं के लिए धन उपलब्धता
यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वेतन वृद्धि से विकास योजनाओं और वेलफेयर स्कीम्स पर कोई नकारात्मक असर न पड़े।
3.पेंशन प्रणाली की लागत
गैर-योगदान आधारित पेंशन योजनाओं (Non-contributory pension schemes) की लागत का भी मूल्यांकन किया जाएगा ताकि भविष्य में इसका बोझ संतुलित रहे।
4.राज्य सरकारों पर असर
अक्सर राज्य सरकारें केंद्र के वेतन आयोग की सिफारिशों को थोड़े बदलाव के साथ लागू करती हैं, इसलिए इसके राज्य के बजट पर प्रभाव का भी विश्लेषण किया जाएगा।
5.सार्वजनिक क्षेत्र और निजी क्षेत्र से तुलना
आयोग सार्वजनिक क्षेत्र (PSUs) और निजी क्षेत्र (Private Sector) के कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और कार्य परिस्थितियों की तुलना करेगा, ताकि केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए उचित संतुलन सुनिश्चित किया जा सके।
8वें वेतन आयोग से किसे होगा लाभ?
इस आयोग की सिफारिशें मुख्यतः निम्नलिखित को प्रभावित करेंगी:
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केंद्र सरकार के लगभग 50 लाख कर्मचारी
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करीब 69 लाख सेवानिवृत्त पेंशनधारी (Pensioners)
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केंद्रीय मंत्रालयों, रेलवे, रक्षा, डाक विभाग, और केंद्रीय पुलिस बलों के कर्मचारी
इसका असर अप्रत्यक्ष रूप से राज्य सरकारों और सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) पर भी पड़ेगा क्योंकि वे आमतौर पर केंद्र की सिफारिशों को अपनाते हैं।
7वें और 8वें वेतन आयोग में अंतर क्या है?
| बिंदु | 7वां वेतन आयोग | 8वां वेतन आयोग |
|---|---|---|
| गठन | फरवरी 2014 | जनवरी 2025 |
| अध्यक्ष | न्यायमूर्ति ए.के. माथुर | न्यायमूर्ति रंजन प्रकाश देसाई |
| रिपोर्ट लागू | 1 जनवरी 2016 | संभावित 1 जनवरी 2026 |
| मुख्य सिफारिश | वेतन में औसतन 23.55% वृद्धि | अभी तय नहीं (18 माह में रिपोर्ट) |
8वें वेतन आयोग से कितनी बढ़ेगी सैलरी?
हालांकि अभी आधिकारिक तौर पर प्रतिशत वृद्धि का अनुमान नहीं दिया गया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि 8वें वेतन आयोग से
👉 बेसिक पे (Basic Pay) में 25% से 30% तक की वृद्धि हो सकती है।
साथ ही,
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HRA (House Rent Allowance),
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TA (Travel Allowance),
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DA (Dearness Allowance)
में भी वृद्धि संभव है।
क्या बदल सकता है डीए (Dearness Allowance) का सिस्टम?
केंद्र सरकार हर छह महीने में DA (महंगाई भत्ता) की समीक्षा करती है ताकि महंगाई दर (Inflation) के प्रभाव को संतुलित किया जा सके।
फिलहाल, 7वें वेतन आयोग के तहत DA का रेट 46% तक पहुंच चुका है।
8वें वेतन आयोग के बाद यह नए बेसिक पे के आधार पर रीसेट किया जाएगा।
पेंशनधारियों के लिए भी बड़ी राहत
8वें वेतन आयोग की सिफारिशें केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं होंगी। इससे केंद्र सरकार के 69 लाख पेंशनभोगियों को भी लाभ मिलेगा।
संभावना है कि:
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पेंशन में न्यूनतम सीमा (Minimum Pension) बढ़ाई जाए,
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महंगाई राहत (Dearness Relief) के फॉर्मूले में संशोधन हो,
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और स्वास्थ्य भत्तों (Health Benefits) को भी नया स्वरूप मिले।
क्या 8वें वेतन आयोग से सरकार पर बढ़ेगा बोझ?
हाँ, वित्त मंत्रालय के अनुमानों के अनुसार, 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने से केंद्र सरकार के बजट पर अतिरिक्त 1.5 से 2 लाख करोड़ रुपये का बोझ पड़ सकता है।
लेकिन यह बोझ देश की GDP वृद्धि और राजस्व में वृद्धि के साथ संतुलित किया जा सकता है।
क्यों जरूरी है नया वेतन आयोग?
भारत में हर 10 साल में एक नया वेतन आयोग गठित किया जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि:
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सरकारी कर्मचारियों की वेतन संरचना बदलती आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप रहे,
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निजी क्षेत्र के साथ वेतन में असमानता न हो,
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और कर्मचारियों में काम के प्रति प्रेरणा (Motivation) बनी रहे।
8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट लागू होने की संभावित तारीख
👉 यदि सब कुछ तय समय पर हुआ, तो 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें जनवरी 2026 से लागू होंगी।
इससे पहले, आयोग मध्यांतर रिपोर्ट (Interim Report) भी पेश कर सकता है ताकि कुछ संशोधन जल्दी लागू किए जा सकें।
कर्मचारियों की उम्मीदें
कई कर्मचारी संघों (Employees’ Associations) ने सरकार से यह मांग की है कि —
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7वें वेतन आयोग की तरह लंबा इंतजार न कराया जाए,
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फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) कम से कम 3.0 किया जाए,
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और DA को बेसिक पे में मर्ज किया जाए।
यदि ऐसा होता है तो कर्मचारियों की सैलरी में बड़ी छलांग संभव है।
निष्कर्ष: मोदी सरकार का बड़ा फैसला, उम्मीदों पर खरा उतर सकता है 8वां वेतन आयोग
मोदी सरकार द्वारा 8वें वेतन आयोग की Terms of Reference मंजूर करना केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए बहुप्रतीक्षित तोहफा साबित हो सकता है।
अब सबकी निगाहें आयोग की रिपोर्ट पर टिकी हैं जो अगले 18 महीनों में आएगी।
यदि सब कुछ योजना के अनुसार हुआ, तो 1 जनवरी 2026 से कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन में भारी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

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