Chhath Puja 2025 क्या है? (छठ पूजा 2025 का परिचय)
Chhath Puja 2025 एक प्रमुख हिंदू त्योहार है जो सूर्य देव और उनकी बहन छठी मइया को समर्पित है। यह पर्व चार दिनों तक मनाया जाता है और मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है।
यह पर्व न सिर्फ धार्मिक महत्व रखता है बल्कि पर्यावरण, स्वास्थ्य और सामाजिक समानता का संदेश भी देता है। छठ पूजा में लोग सूर्य की उपासना करते हैं क्योंकि सूर्य को जीवन, ऊर्जा और स्वास्थ्य का स्रोत माना जाता है।

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Chhath Puja 2025 की तारीख और समय
हिंदू पंचांग के अनुसार छठ पूजा कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाई जाती है, जो दीपावली के छह दिन बाद आती है।
Drik Panchang के अनुसार Chhath Puja 2025 की तारीखें और पूजा के चारों दिन इस प्रकार हैं👇
| पर्व का नाम | तारीख | सूर्योदय | सूर्यास्त |
|---|---|---|---|
| नहाय खाय (पहला दिन) | 25 अक्टूबर 2025 | 06:11 AM | 05:56 PM |
| लोहंडा और खरना (दूसरा दिन) | 26 अक्टूबर 2025 | 06:12 AM | 05:55 PM |
| संध्या अर्घ्य (तीसरा दिन) | 27 अक्टूबर 2025 | 06:12 AM | 05:55 PM |
| उषा अर्घ्य एवं पारण (चौथा दिन) | 28 अक्टूबर 2025 | 06:12 AM | 05:54 PM |
Chhath Puja 2025 का महत्व (छठ पूजा का धार्मिक महत्त्व)
छठ पूजा का उल्लेख वेदों और पुराणों में मिलता है। माना जाता है कि यह पर्व सूर्य देव की आराधना का सबसे शुद्ध और प्राचीन रूप है।
कहा जाता है कि महाभारत काल में द्रौपदी और पांडवों ने भी छठ व्रत रखा था ताकि वे अपने जीवन में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य प्राप्त कर सकें।
Chhath Puja 2025 के माध्यम से लोग सूर्य देव को धन्यवाद देते हैं कि उनकी कृपा से पृथ्वी पर जीवन संभव है। सूर्य की ऊर्जा से ही जल, वायु और संपूर्ण प्रकृति का संचालन होता है।
Chhath Puja 2025 के चारों दिन की विस्तृत जानकारी
1.पहला दिन – नहाय खाय (Nahay Khay 2025)
तारीख: 25 अक्टूबर 2025
इस दिन व्रती (उपवास करने वाले व्यक्ति) प्रातःकाल गंगा, नदी या तालाब में स्नान करते हैं। इसके बाद घर को पूरी तरह से साफ किया जाता है और शुद्ध भोजन बनाया जाता है।
भोजन में लौकी-भात या कद्दू-भात बनाया जाता है जिसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। यह दिन पवित्रता और शुद्धता का प्रतीक होता है।
2.दूसरा दिन – लोहंडा और खरना (Kharna 2025)
तारीख: 26 अक्टूबर 2025
इस दिन व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखते हैं और शाम के समय गुड़ की खीर, रोटी और केला का प्रसाद बनाकर सूर्य देव को अर्पित करते हैं।
इसके बाद व्रती और परिवार के लोग प्रसाद ग्रहण करते हैं।
कहा जाता है कि खरना के दिन का व्रत आत्म-शुद्धि और अनुशासन का प्रतीक है।
3.तीसरा दिन – संध्या अर्घ्य (Sandhya Arghya 2025)
तारीख: 27 अक्टूबर 2025
इस दिन महिलाएँ और पुरुष दोनों मिलकर सूर्यास्त के समय सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं।
घाटों पर विशेष तैयारी की जाती है, मिट्टी के दीये जलाए जाते हैं, और घाट को फूलों से सजाया जाता है।
सूर्य देव को ठेकुआ, फल, और गन्ना का अर्पण किया जाता है। यह दिन अत्यंत शुभ और भावनात्मक होता है।
4.चौथा दिन – उषा अर्घ्य और पारण (Usha Arghya 2025)
तारीख: 28 अक्टूबर 2025
अंतिम दिन व्रती प्रातःकाल उगते हुए सूर्य को अंतिम अर्घ्य देते हैं और परिवार के सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
इसके बाद व्रत का पारण किया जाता है यानी उपवास तोड़ा जाता है।
यह दिन व्रत के समापन का प्रतीक है और पूरे परिवार में खुशियाँ मनाई जाती हैं।
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Chhath Puja 2025 का वैज्ञानिक और पर्यावरणीय दृष्टिकोण
छठ पूजा केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस दौरान सूर्य की ऊर्जा को ग्रहण करने की प्रक्रिया से शरीर को विटामिन D मिलता है, जो प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।
साथ ही, छठ पूजा में उपयोग किए जाने वाले सभी प्रसाद प्राकृतिक होते हैं — जैसे फल, गुड़, गन्ना, नारियल, और ठेकुआ।
यह पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देता है कि हमें प्रकृति के साथ तालमेल बनाकर जीवन जीना चाहिए।
Chhath Puja 2025 में पूजा के आवश्यक सामान (पूजन सामग्री सूची)
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बाँस की टोकरी और सूप
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नारियल, गन्ना, केला, सेब, अमरूद, मिठाई
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ठेकुआ, खीर, चावल, गुड़
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दीया, धूपबत्ती, कलश
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दूध, जल, अरघ्य के लिए थाली
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साफ कपड़े और पीले वस्त्र
Chhath Puja 2025 की मान्यताएँ और कथाएँ
कथाओं के अनुसार, छठी मइया सूर्य देव की बहन मानी जाती हैं जो संतान की रक्षा और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।
एक अन्य कथा के अनुसार, राजा प्रियव्रत और रानी मालिनी ने संतान प्राप्ति के लिए इस व्रत को किया था, जिससे उन्हें पुत्र रत्न प्राप्त हुआ।
Chhath Puja 2025 का सामाजिक संदेश
छठ पूजा समानता, स्वच्छता और सामाजिक एकता का संदेश देती है।
इस पर्व में अमीर-गरीब, स्त्री-पुरुष, सभी एक साथ घाटों पर पूजा करते हैं — बिना किसी भेदभाव के।
यह पर्व हमें सिखाता है कि प्रकृति और मनुष्य का रिश्ता आपसी सहयोग और सम्मान पर आधारित है।
Chhath Puja 2025 से जुड़ी सावधानियाँ
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व्रती को पूर्ण शुद्धता और स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए।
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भोजन में प्याज-लहसुन का उपयोग न करें।
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नदी या तालाब पर पूजा करते समय सुरक्षा नियमों का पालन करें।
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प्रसाद बनाते समय धातु के बर्तनों की जगह मिट्टी या पीतल का उपयोग करें।
Chhath Puja 2025: निष्कर्ष
Chhath Puja 2025 सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह प्रकृति, स्वास्थ्य और सामूहिकता का उत्सव है।
यह हमें सिखाता है कि सूर्य की ऊर्जा के बिना जीवन असंभव है और हमें प्रकृति के साथ तालमेल बनाकर जीवन जीना चाहिए।
चार दिनों की यह पूजा, व्रत, और आस्था हर वर्ष लाखों लोगों के जीवन में नई रोशनी और सकारात्मकता लेकर आती है।

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