छठ पूजा बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाने वाला एक प्रमुख पर्व है। यह सूर्य देवता और छठी माई (ऊषा देवी) की उपासना का पर्व है। यह पूजा सूर्य देव को धन्यवाद देने और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए की जाती है।
छठ पूजा चार दिनों तक चलती है, जिसमें पहला दिन “नहाय खाय” (Nahay Khay) सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है।

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नहाय खाय क्या है? (What is Nahay Khay in Chhath Puja)
“Nahay Khay” का मतलब होता है “नहाकर खाना”। यह छठ पूजा का पहला दिन होता है और इस दिन से व्रत की शुरुआत होती है।
इस दिन व्रती (जो व्रत रखते हैं) शुद्ध जल से स्नान करते हैं और सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। इस दिन का उद्देश्य शरीर और मन दोनों को शुद्ध करना होता है ताकि आने वाले दिनों में पूरी श्रद्धा से सूर्य उपासना की जा सके।
नहाय खाय छठ पूजा 2025 की तिथि (Nahay Khay Chhath Puja 2025 Date)
| पर्व | तिथि | दिन |
|---|---|---|
| नहाय खाय | 25 अक्टूबर 2025 | बुधवार |
| खरना (लोहंडा) | 26 अक्टूबर 2025 | गुरुवार |
| संध्या अर्घ्य | 27 अक्टूबर 2025 | शुक्रवार |
| उषा अर्घ्य | 28 नवंबर 2025 | शनिवार |
🕉️ इस प्रकार छठ पूजा 2025 में नहाय खाय की शुरुआत 25 अक्टूबर से होगी।
नहाय खाय का शुभ मुहूर्त (Nahay Khay Shubh Muhurat 2025)
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स्नान और पूजा का समय: सुबह सूर्योदय के बाद (06:10 AM – 07:30 AM के बीच)
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सूर्योदय समय: लगभग 06:10 AM
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सूर्यास्त समय: लगभग 05:10 PM
ध्यान दें कि मुहूर्त आपके शहर के अनुसार थोड़ा अलग हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग अवश्य देखें।
नहाय खाय छठ पूजा का महत्व (Nahay Khay Chhath Puja Importance)
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शरीर और मन की शुद्धता: नहाय खाय से व्रती अपने शरीर और आत्मा को शुद्ध करते हैं।
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सात्विक भोजन से शुरुआत: इस दिन केवल एक बार भोजन किया जाता है जो शुद्ध देसी घी में बना होता है।
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सूर्य देव का आशीर्वाद: छठ पूजा सूर्य देव की कृपा प्राप्त करने का पर्व है, जिससे जीवन में स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि आती है।
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प्रकृति और जल की आराधना: यह पर्व जल, वायु और सूर्य जैसे प्राकृतिक तत्वों की पूजा का प्रतीक है।
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आस्था और अनुशासन: नहाय खाय से छठ पूजा की यात्रा की शुरुआत होती है, जिसमें अनुशासन और श्रद्धा का विशेष महत्व है।
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नहाय खाय का व्रत और भोजन नियम (Nahay Khay Ritual and Rules)
स्नान की विधि (Bathing Ritual)
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व्रती प्रातःकाल नदी, तालाब या गंगा जल में स्नान करते हैं।
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स्नान के बाद घर में प्रवेश से पहले शुद्ध वस्त्र पहनते हैं।
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घर में गंगाजल या गौमूत्र से शुद्धिकरण किया जाता है।
भोजन विधि (Food Ritual)
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भोजन केवल एक बार किया जाता है।
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व्रती स्वयं ही भोजन बनाते हैं।
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भोजन में लहसुन-प्याज का प्रयोग नहीं होता।
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आमतौर पर कद्दू, चने की दाल और चावल से बना खाना बनाया जाता है।
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भोजन को सूर्य देव को अर्पित कर प्रसाद रूप में ग्रहण किया जाता है।
नहाय खाय का आध्यात्मिक अर्थ (Spiritual Meaning of Nahay Khay)
“Nahay Khay” आत्मशुद्धि और संयम का प्रतीक है। जब व्रती शुद्ध मन से इस व्रत की शुरुआत करते हैं, तो यह उनके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक स्थिरता लाता है। यह आत्मसंयम और भक्ति की पराकाष्ठा को दर्शाता है।
नहाय खाय के नियम और सावधानियाँ (Rules & Precautions of Nahay Khay)
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घर की सफाई करें और गंगाजल से शुद्धिकरण करें।
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व्रती शुद्ध वस्त्र (आमतौर पर पीले या सफ़ेद रंग के) पहनें।
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नहाय खाय के दिन कोई मांसाहारी भोजन नहीं खाया जाता।
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घर में सात्विक माहौल बनाए रखें।
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पूजा और भोजन बनाते समय व्रती अकेले हों और पूर्ण ध्यान रखें।
नहाय खाय में क्या बनता है (Nahay Khay Special Food)
| व्यंजन | सामग्री | विशेषता |
|---|---|---|
| कद्दू भात | चावल, चने की दाल, कद्दू | सबसे मुख्य प्रसाद |
| साग और दाल | देसी घी में बना सात्विक भोजन | स्वास्थ्यवर्धक |
| फल और मिठाई | केला, सेब, गुड़, खीर | पूजा के लिए प्रसाद |
छठ पूजा के चार दिन (Four Days of Chhath Puja)
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नहाय खाय (पहला दिन): शुद्धता और प्रारंभ।
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खरना या लोहंडा (दूसरा दिन): गुड़ की खीर और व्रत आरंभ।
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संध्या अर्घ्य (तीसरा दिन): अस्त होते सूर्य को अर्घ्य।
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उषा अर्घ्य (चौथा दिन): उगते सूर्य को अर्घ्य और व्रत पूर्ण।
नहाय खाय पूजा विधि (Nahay Khay Puja Vidhi)
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स्नान कर सूर्य देव का ध्यान करें।
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गंगाजल से घर के पूजा स्थान की सफाई करें।
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सूर्य देव के सामने दीप जलाएं और जल अर्पित करें।
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भोजन (कद्दू-भात) बनाएं और सूर्य देव को अर्पित करें।
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उसी भोजन को प्रसाद के रूप में ग्रहण करें।
नहाय खाय का धार्मिक महत्व (Religious Importance of Nahay Khay)
नहाय खाय का धार्मिक महत्व यह है कि यह दिन व्रती को तप, संयम और भक्ति की राह पर चलने के लिए तैयार करता है।
माना जाता है कि इस दिन सूर्य देव की कृपा से सभी नकारात्मक ऊर्जाएँ समाप्त होती हैं और घर में सकारात्मकता आती है।
नहाय खाय छठ पूजा से जुड़ी मान्यताएँ (Beliefs and Traditions)
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कहा जाता है कि छठी माई (सूर्य देव की पत्नी) अपने भक्तों की मनोकामना पूरी करती हैं।
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नहाय खाय के दिन किया गया सात्विक भोजन पूरे व्रत की सफलता का आधार होता है।
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जो भी व्यक्ति श्रद्धा और नियम से नहाय खाय करता है, उसे स्वास्थ्य, समृद्धि और संतान सुख का आशीर्वाद मिलता है।
नहाय खाय का सामाजिक संदेश (Social Message)
छठ पूजा केवल धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक पर्व भी है।
यह पर्व स्वच्छता, सामूहिकता और पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक है।
नदियों, तालाबों और जलाशयों को स्वच्छ रखने का संदेश इस पर्व के माध्यम से दिया जाता है।
नहाय खाय छठ पूजा 2025 में विशेष योग (Special Yog on Nahay Khay 2025)
2025 में नहाय खाय के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है, जो पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
इस योग में की गई सूर्य उपासना से जीवन में सुख और समृद्धि का संचार होता है।
नहाय खाय के बाद क्या करें (What to Do After Nahay Khay)
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खरना की तैयारी शुरू करें।
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घर में प्रसाद और पूजा सामग्री एकत्रित करें।
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अगले दिन व्रत के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार रहें।
निष्कर्ष (Conclusion)
Nahay Khay Chhath Puja 2025 सूर्य उपासना की शुरुआत का प्रतीक है।
यह दिन शुद्धता, श्रद्धा और संयम का प्रतीक है, जो छठ पर्व की आत्मा को दर्शाता है।
जो भी व्यक्ति सच्चे मन से नहाय खाय और छठ पूजा का व्रत करता है, उसे जीवन में सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
FAQ – Nahay Khay Chhath Puja 2025
Q1. नहाय खाय कब है 2025 में?
👉 25 अक्टूबर 2025 (बुधवार) को नहाय खाय मनाया जाएगा।
Q2. नहाय खाय में क्या खाना चाहिए?
👉 कद्दू-भात, चने की दाल और सात्विक भोजन खाया जाता है।
Q3. नहाय खाय क्यों मनाया जाता है?
👉 शरीर और मन की शुद्धता के लिए, ताकि व्रती पूरे समर्पण के साथ छठ व्रत कर सके।
Q4. नहाय खाय का समय क्या है?
👉 सूर्योदय के बाद सुबह 06:10 से 07:30 बजे के बीच सबसे शुभ माना गया है।
Q5. नहाय खाय कौन करता है?
👉 छठ व्रती (महिलाएं या पुरुष) जो सूर्य उपासना करते हैं, वे नहाय खाय करते हैं।

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