विधानसभा चुनाव प्रचार के बीच सीवान में निर्दलीय प्रत्याशी की गाड़ी से पिस्टल व राइफल बरामद, प्रशासन में हड़कंप

बिहार विधानसभा चुनाव का माहौल इस समय पूरे राज्य में गर्म है। हर जिले में प्रत्याशी अपने-अपने तरीके से प्रचार अभियान में जुटे हुए हैं। लेकिन इस बीच सीवान जिले से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जिसने न सिर्फ प्रशासन को सतर्क कर दिया है, बल्कि जनता के बीच भी हलचल मचा दी है। खबर है कि सीवान में एक निर्दलीय प्रत्याशी की गाड़ी से पिस्टल और राइफल बरामद की गई है।
यह घटना चुनाव प्रचार के बीच हुई, जब पुलिस ने एक विशेष अभियान के दौरान संदिग्ध वाहनों की तलाशी शुरू की थी। उसी वक्त यह गाड़ी पकड़ी गई, और जांच के दौरान हथियारों का जखीरा सामने आया।
घटना कैसे हुई
सूत्रों के अनुसार, मंगलवार देर शाम सीवान पुलिस जिले के एक इलाके में वाहनों की चेकिंग कर रही थी। चुनाव आयोग के निर्देश पर जिले में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी ताकि किसी भी तरह का अवैध हथियार, शराब या पैसे का इस्तेमाल चुनाव में न हो सके।
इसी दौरान एक एसयूवी गाड़ी पुलिस टीम को देखकर थोड़ा पीछे मुड़ी, जिससे शक हुआ। पुलिस ने पीछा कर गाड़ी को रोका और उसकी तलाशी ली। तलाशी के दौरान डिक्की से एक पिस्टल, एक राइफल और कई जिंदा कारतूस बरामद हुए।
गाड़ी पर लगे पोस्टर और झंडे से पता चला कि वह एक निर्दलीय प्रत्याशी के चुनाव प्रचार में उपयोग की जा रही थी।
पुलिस की कार्रवाई
हथियार बरामद होते ही पुलिस ने गाड़ी को जब्त कर लिया और ड्राइवर को हिरासत में लिया। बाद में पुलिस ने संबंधित निर्दलीय प्रत्याशी को भी पूछताछ के लिए बुलाया।
पुलिस अधीक्षक (SP) ने बताया कि इस मामले में आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है और यह जांच की जा रही है कि ये हथियार कहां से आए और चुनाव के समय इनका इस्तेमाल किस मकसद से किया जाना था।
SP ने कहा —
“हम किसी भी प्रत्याशी को कानून से ऊपर नहीं मानते। चाहे वह किसी पार्टी से हो या निर्दलीय। अगर किसी के पास अवैध हथियार मिले तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
चुनाव आयोग की सख्ती
इस घटना के बाद चुनाव आयोग ने भी संज्ञान लिया है। आयोग ने जिला प्रशासन से पूरी रिपोर्ट मांगी है और निर्देश दिया है कि चुनाव क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ाई जाए।
चुनाव आयोग पहले से ही राज्य में अवैध हथियारों और नकदी पर नजर रख रहा है ताकि निष्पक्ष मतदान हो सके। सीवान जैसे संवेदनशील जिले में इस तरह की घटना चुनाव आयोग के लिए चिंता का विषय बन गई है।
प्रत्याशी का पक्ष
विधानसभा चुनाव प्रचार के बीच सीवान में निर्दलीय प्रत्याशी की गाड़ी से पिस्टल व राइफल बरामद, प्रशासन में हड़कंप
उधर, आरोपी निर्दलीय प्रत्याशी ने अपनी सफाई में कहा कि उन्हें इस घटना की कोई जानकारी नहीं है। उनका कहना है कि यह गाड़ी उनके प्रचार कार्य में लगी थी, लेकिन हथियारों के बारे में उन्हें कुछ नहीं पता।
उनका बयान था —
“मेरे विरोधी मुझे बदनाम करने के लिए साजिश कर रहे हैं। मैं हमेशा कानून का पालन करने वाला नागरिक हूं। अगर किसी ने मेरी गाड़ी में कुछ रख दिया, तो उसकी जिम्मेदारी मेरी नहीं है।”
हालांकि, पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। यह भी देखा जा रहा है कि क्या वास्तव में यह राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का हिस्सा है या अवैध हथियारों की तस्करी से जुड़ा मामला।
जनता की प्रतिक्रिया
इस खबर के फैलते ही सीवान जिले के मतदाताओं के बीच मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ लोगों ने कहा कि ऐसे उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने का हक नहीं होना चाहिए जो अवैध गतिविधियों में शामिल पाए जाएं।
स्थानीय निवासी रामविलास यादव ने कहा —
“अगर कोई उम्मीदवार ईमानदार है तो उसे हथियारों की जरूरत क्यों? जनता को डराकर वोट नहीं लिया जा सकता।”
वहीं कुछ लोग यह भी मानते हैं कि यह मामला साजिश भी हो सकता है, क्योंकि चुनाव के समय अक्सर प्रतिद्वंद्वी एक-दूसरे को फंसाने की कोशिश करते हैं।
सीवान का राजनीतिक माहौल
सीवान जिला हमेशा से राजनीतिक रूप से चर्चित रहा है। यहां कई बार चुनावी हिंसा, हथियारबंदी और धमकियों की खबरें आती रही हैं। इस बार भी माहौल कुछ अलग नहीं है। हर प्रत्याशी अपनी ताकत दिखाने में लगा है।
ऐसे में इस तरह की घटनाएं चुनाव की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती हैं। स्थानीय प्रशासन ने कहा है कि जिले में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए जा रहे हैं ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी
घटना के बाद से पुलिस और खुफिया विभाग सतर्क हो गया है। जिला प्रशासन ने निर्देश दिया है कि सभी प्रचार वाहनों और काफिलों की सख्त चेकिंग की जाए।
इसके अलावा, पुलिस ने कई जगहों पर नाकाबंदी कर दी है और रात में पेट्रोलिंग बढ़ा दी गई है। इस कार्रवाई का मकसद साफ है — चुनाव के दौरान किसी भी तरह की अवैध गतिविधि पर रोक लगाना।
लोकतंत्र में हथियारों की जगह नहीं
इस पूरे मामले ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है — क्या लोकतंत्र में चुनाव प्रचार के लिए हथियारों का इस्तेमाल होना चाहिए? लोकतंत्र में चुनाव का मतलब विचारों की लड़ाई है, न कि डर और धमकी से जीत हासिल करना।
ऐसे में अगर उम्मीदवार या उनके समर्थक अवैध हथियार रखते हैं, तो यह न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा के खिलाफ भी है।
FAQ :
Q1. सीवान में निर्दलीय प्रत्याशी की गाड़ी से क्या बरामद हुआ?
👉 पुलिस ने गाड़ी से एक पिस्टल, एक राइफल और कई जिंदा कारतूस बरामद किए हैं।
Q2. यह घटना कब और कैसे हुई?
👉 यह घटना विधानसभा चुनाव प्रचार के बीच हुई, जब पुलिस वाहनों की चेकिंग कर रही थी और एक संदिग्ध गाड़ी की तलाशी के दौरान हथियार मिले।
Q3. आरोपी प्रत्याशी कौन हैं और क्या उन्होंने अपनी गलती मानी है?
👉 आरोपी निर्दलीय प्रत्याशी ने कहा कि उन्हें इस घटना की कोई जानकारी नहीं है और यह राजनीतिक साजिश हो सकती है।
Q4. पुलिस ने क्या कार्रवाई की है?
👉 पुलिस ने गाड़ी जब्त कर चालक को हिरासत में लिया है और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
Q5. चुनाव आयोग ने क्या कदम उठाया है?
👉 चुनाव आयोग ने घटना की रिपोर्ट मांगी है और सीवान में अतिरिक्त सुरक्षा के निर्देश जारी किए हैं ताकि चुनाव निष्पक्ष रूप से संपन्न हो।
निष्कर्ष
सीवान की यह घटना चुनावी माहौल में एक गंभीर चेतावनी है कि चुनावी राजनीति में अब भी कुछ लोग कानून को ताक पर रखकर ताकत के बल पर जीतना चाहते हैं। लेकिन प्रशासन और आयोग की सख्ती यह दिखाती है कि ऐसे लोगों को बख्शा नहीं जाएगा।
इस घटना से यह भी स्पष्ट है कि जनता को अब ज्यादा जागरूक होना पड़ेगा। वोट केवल वादों पर नहीं, बल्कि उम्मीदवार के चरित्र और ईमानदारी पर देना होगा।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे ऐसे मामले यह याद दिला रहे हैं कि लोकतंत्र को बचाने के लिए सिर्फ वोट डालना काफी नहीं — बल्कि ईमानदार राजनीति को चुनना भी उतना ही जरूरी है।

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