प्रशांत किशोर ने बिहार चुनाव नहीं लड़ने का फ़ैसला किया—जानिए वजह - NamasteSamachar

प्रशांत किशोर ने बिहार चुनाव नहीं लड़ने का फ़ैसला किया—जानिए वजह

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बिहार की राजनीति में हमेशा से नई हलचल देखने को मिलती रही है। 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले सबकी निगाहें एक बार फिर प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) पर टिकी थीं। कई राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना था कि इस बार पीके खुद चुनाव मैदान में उतर सकते हैं और अपने संगठन जन सुराज अभियान को नई दिशा देंगे।
लेकिन हाल ही में आई खबरों ने साफ कर दिया है कि प्रशांत किशोर बिहार चुनाव 2025 में कोई सीट से चुनाव नहीं लड़ेंगे।

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कौन हैं प्रशांत किशोर?

प्रशांत किशोर, जिन्हें अक्सर पीके के नाम से जाना जाता है, भारत के सबसे चर्चित चुनाव रणनीतिकारों में से एक हैं।
उन्होंने नरेंद्र मोदी, नीतीश कुमार, ममता बनर्जी, जगन मोहन रेड्डी, और कांग्रेस जैसे बड़े नेताओं और पार्टियों के साथ काम किया है।
उनकी रणनीति और चुनावी प्लानिंग के कारण कई दलों को अप्रत्याशित जीत मिली है।

2018 में उन्होंने राजनीति में सक्रिय रूप से कदम रखा और बाद में जन सुराज अभियान की शुरुआत की। इस अभियान का उद्देश्य बिहार के हर गांव और पंचायत में लोगों की समस्याओं को समझकर विकास का एक नया मॉडल तैयार करना था।

जन सुराज अभियान क्या है?

जन सुराज कोई राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन है, जो बिहार के लोगों को जोड़ने की कोशिश करता है।
प्रशांत किशोर ने 2021 में यह यात्रा शुरू की थी और तब से वे लगातार बिहार के अलग-अलग जिलों में जाकर जनता से संवाद कर रहे हैं।
उनका कहना था —

“बिहार तब बदलेगा जब जनता खुद बदलाव की जिम्मेदारी लेगी।”

इस अभियान के दौरान उन्होंने हजारों किलोमीटर की पदयात्रा की और जनता से सीधे जुड़ाव बनाया।

2025 में प्रशांत किशोर के चुनाव न लड़ने के कारण

2025 में जब बिहार चुनाव की तैयारियाँ शुरू हुईं, तो मीडिया और जनता के बीच यह चर्चा थी कि प्रशांत किशोर किसी सीट से चुनाव लड़ेंगे।
लेकिन उन्होंने खुद बयान देकर स्पष्ट किया कि वे फिलहाल चुनाव नहीं लड़ेंगे

इसके पीछे कुछ प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं:

  1. जन आंदोलन को मजबूत करना:
    वे चाहते हैं कि जन सुराज पहले एक सशक्त संगठन बने, जो समाज के हर वर्ग की आवाज उठाए।

  2. राजनीति से ऊपर जनता का एजेंडा:
    पीके का कहना है कि उनकी प्राथमिकता जनता की समस्या और बिहार का विकास है, न कि व्यक्तिगत सत्ता।

  3. संगठन निर्माण का समय:
    जन सुराज अभी भी अपने प्रारंभिक चरण में है। वे चाहते हैं कि यह अभियान पहले बिहार के सभी जिलों में मजबूत रूप से फैल जाए।

  4. जनता से सीधा जुड़ाव बनाए रखना:
    अगर वे चुनाव लड़ते, तो यह अभियान एक राजनीतिक दल की तरह दिखता। पीके नहीं चाहते कि लोग इसे “राजनीतिक प्रचार” समझें।

बिहार की राजनीति पर असर

प्रशांत किशोर के चुनाव न लड़ने के फैसले का बिहार की राजनीति पर बड़ा असर पड़ सकता है।
जहां एक ओर कई लोग उम्मीद कर रहे थे कि वे एक नए विकल्प के रूप में उभरेंगे, वहीं अब यह फैसला कई राजनीतिक समीकरणों को बदल सकता है।

  • नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव के लिए यह राहत की खबर है, क्योंकि दोनों के सामने एक नए चेहरे की चुनौती नहीं होगी।

  • वहीं जन सुराज समर्थक थोड़े निराश जरूर हुए हैं, लेकिन वे मानते हैं कि पीके का लंबा विज़न है और वे जल्द ही बिहार की राजनीति को नई दिशा देंगे।

जनता की प्रतिक्रिया

सोशल मीडिया पर पीके के इस फैसले पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
कई लोगों ने कहा कि प्रशांत किशोर को अब राजनीति में उतरना ही चाहिए, ताकि बिहार में असली बदलाव हो सके।
वहीं कुछ लोगों ने उनके फैसले की सराहना करते हुए कहा कि बिहार को पहले जन आंदोलन की जरूरत है, फिर राजनीतिक दल की।

क्या भविष्य में प्रशांत किशोर चुनाव लड़ सकते हैं?

प्रशांत किशोर ने साफ कहा है कि वो राजनीति से दूर नहीं हैं, लेकिन अभी उनका फोकस जन सुराज अभियान को सशक्त बनाना है।
उन्होंने यह भी इशारा दिया कि जब जनता चाहेगी, तभी वे अगला कदम उठाएँगे।

इसका मतलब साफ है कि भविष्य में वे राजनीति में सक्रिय रूप से उतर सकते हैं, लेकिन सही समय आने पर।

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बिहार में जनता की उम्मीदें

बिहार के युवाओं में प्रशांत किशोर को लेकर काफी उत्साह है।
उनकी साफ छवि, विचारों की स्पष्टता और बदलाव की बात लोगों को आकर्षित करती है।
कई लोग उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में देखते हैं जो जाति और धर्म से ऊपर उठकर बिहार के लिए सोचते हैं।

जनता को उम्मीद है कि आने वाले समय में प्रशांत किशोर बिहार के लिए एक नया राजनीतिक विकल्प देंगे, जो विकास, शिक्षा, रोजगार और सुशासन पर आधारित होगा।

निष्कर्ष

बिहार चुनाव 2025 में प्रशांत किशोर के मैदान में न उतरने से भले ही कुछ लोगों को निराशा हुई हो, लेकिन उन्होंने एक बड़ा संदेश दिया है —
“बदलाव सिर्फ चुनाव से नहीं, जनता की सोच से आता है।”

उनका यह फैसला बताता है कि वे सत्ता नहीं, बल्कि सिस्टम बदलने की सोच रखते हैं।
भविष्य में जब जन सुराज एक मजबूत संगठन बन जाएगा, तब शायद प्रशांत किशोर राजनीति में कदम रखेंगे और बिहार को एक नई दिशा देंगे।

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