इस बार का करवा चौथ है खास! बन रहा है 100 साल बाद का शुभ संयोग!

हर साल की तरह इस साल भी करवा चौथ का पर्व देशभर में बड़ी धूमधाम से मनाया जाएगा, लेकिन 2025 का करवा चौथ कुछ अलग और बेहद खास होने वाला है। ज्योतिष के अनुसार इस बार का करवा चौथ 100 साल बाद बन रहे एक अद्भुत और शुभ संयोग के कारण बेहद शुभ माना जा रहा है। इस दिन ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति ऐसी बन रही है, जो न केवल व्रत करने वाली महिलाओं के लिए बल्कि उनके परिवार के लिए भी मंगलदायक मानी जा रही है।
आइए जानते हैं कि आखिर क्यों इस बार का करवा चौथ 100 साल में एक बार आने वाला शुभ योग लेकर आया है, इसका धार्मिक महत्व क्या है और इस दिन पूजा-पाठ करते समय किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
🌕 करवा चौथ क्या है और क्यों मनाया जाता है?
करवा चौथ हिंदू धर्म में पति-पत्नी के रिश्ते में प्रेम, विश्वास और अटूट बंधन का प्रतीक है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक महिलाएं बिना भोजन और पानी ग्रहण किए व्रत करती हैं, और रात में चाँद के दर्शन के बाद पति के हाथ से जल ग्रहण कर व्रत खोलती हैं।
कहते हैं कि करवा चौथ का व्रत सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि भावनात्मक रूप से भी पति-पत्नी के रिश्ते को और मजबूत बनाता है। यह व्रत दिखाता है कि प्रेम में विश्वास, त्याग और समर्पण कितना गहरा होता है।
🌟 क्यों है 2025 का करवा चौथ 100 साल बाद का विशेष?
इस साल का करवा चौथ इसलिए विशेष है क्योंकि इस बार ग्रहों की जो स्थिति बन रही है, वह 100 साल बाद देखने को मिल रही है। 2025 में करवा चौथ पर सिद्ध योग, रवि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग एक साथ बन रहे हैं। इन तीनों योगों का संयोग करवा चौथ जैसे शुभ व्रत को और भी ज्यादा फलदायी बना देगा।
🔸 सिद्ध योग:
यह योग जब भी बनता है, तब किया गया हर कार्य सिद्ध होता है यानी उसका पूरा फल मिलता है। इस दिन करवा चौथ का व्रत रखने और पूजा करने से व्रती महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
🔸 रवि योग:
रवि योग का अर्थ है कि सूर्य देव स्वयं अपनी पूरी शक्ति से तेजस्वी होते हैं। इस योग में किए गए पूजा-पाठ से जीवन में नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सुख-समृद्धि बढ़ती है।
🔸 सर्वार्थ सिद्धि योग:
यह योग सभी इच्छाओं को पूर्ण करने वाला माना जाता है। इस दिन किया गया कोई भी कार्य या व्रत अपने सर्वोत्तम फल देता है। इस योग में व्रत करने से पति-पत्नी दोनों के जीवन में सौभाग्य, लंबी आयु और शांति बनी रहती है।
🌼 इस बार करवा चौथ का शुभ मुहूर्त
- तिथि प्रारंभ: 16 अक्टूबर 2025, सुबह 06:15 बजे
- तिथि समाप्त: 17 अक्टूबर 2025, सुबह 04:45 बजे
- करवा चौथ व्रत पूजा मुहूर्त: शाम 05:46 बजे से रात 07:02 बजे तक
- चंद्रोदय का समय: रात 08:26 बजे
(नोट: समय आपके शहर के अनुसार थोड़ा अलग हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग या विश्वसनीय स्रोत से समय की पुष्टि करें।)
🪔 करवा चौथ की कथा (करवा चौथ व्रत की कहानी)
इस बार का करवा चौथ है खास! बन रहा है 100 साल बाद का शुभ संयोग!
कहा जाता है कि बहुत समय पहले एक राजा की सात बेटियाँ थीं। राजा की सबसे छोटी बेटी बेहद धार्मिक और अपने पति से अत्यधिक प्रेम करने वाली थी। करवा चौथ के दिन उसने व्रत रखा था, लेकिन शाम को उसे बहुत भूख और प्यास लगी। उसके भाईयों को बहन की यह हालत देखी नहीं गई, तो उन्होंने पेड़ के पीछे दर्पण दिखाकर चाँद जैसा प्रतिबिंब बना दिया। बहन ने यह समझकर कि चाँद निकल आया है, व्रत खोल लिया।
इसके बाद उसके पति बीमार पड़ गए। तब उसे पता चला कि उसने व्रत अधूरा तोड़ दिया था। उसने पूरे वर्ष कठोर तपस्या की और अगली करवा चौथ पर पूर्ण श्रद्धा से व्रत किया। इससे उसके पति का जीवन बच गया और वे दीर्घायु हुए। तभी से यह व्रत पति की लंबी उम्र और सुखद वैवाहिक जीवन के लिए किया जाने लगा।
💫 इस दिन बन रहे ग्रह योग का क्या प्रभाव होगा?
2025 के करवा चौथ पर ग्रहों की स्थिति कुछ खास रहेगी।
- चंद्रमा — वृषभ राशि में उच्च स्थिति में रहेगा, जो सौंदर्य, प्रेम और स्थिरता का प्रतीक है।
- शुक्र — तुला राशि में रहेगा, जिससे दांपत्य जीवन में मधुरता और प्रेम बढ़ेगा।
- बुध और सूर्य — कन्या राशि में एक साथ रहेंगे, जिससे पूजा-पाठ और संकल्पों में सिद्धि की संभावना बढ़ेगी।
- शनि — कुंभ राशि में होने से स्थायित्व और दीर्घायु का आशीर्वाद देंगे।
इन सभी ग्रहों की स्थिति मिलकर यह संकेत दे रही है कि इस बार का करवा चौथ बेहद शुभ रहेगा।
🌸 पूजा विधि (करवा चौथ व्रत कैसे करें)
- सुबह जल्दी उठें और स्नान कर के व्रत का संकल्प लें। भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी का ध्यान करें।
- सरगी का सेवन करें — यह व्रत का सबसे खास हिस्सा है, जिसे सास अपने हाथों से देती हैं। इसमें सूखे मेवे, मिठाई और फल शामिल होते हैं।
- दिनभर निर्जला व्रत रखें।
- शाम के समय करवा चौथ पूजा के लिए मिट्टी या पीतल के करवे तैयार करें।
- पूजा थाली में दीया, रोली, चावल, करवा, जल का लोटा, मिठाई और लाल कपड़ा रखें।
- करवा चौथ की कथा सुनें और माता गौरी व भगवान शिव की पूजा करें।
- रात में चाँद के दर्शन कर पति की आरती करें और उनके हाथ से पानी पीकर व्रत खोलें।
🕯️ इस दिन भूलकर भी न करें ये गलतियाँ
- व्रत खोलने से पहले पानी न पिएँ — ऐसा करने से व्रत अधूरा माना जाता है।
- झगड़ा या क्रोध न करें — यह दिन शांति और प्रेम का प्रतीक है, इसलिए मन को शांत रखें।
- काले या सफेद कपड़े न पहनें — लाल, गुलाबी या पीले कपड़े शुभ माने जाते हैं।
- चाँद के दर्शन से पहले कुछ न खाएँ — इससे व्रत का फल कम हो जाता है।
- भूलकर भी किसी का अपमान न करें — इस दिन सभी के प्रति विनम्र और दयालु रहें।
💖 करवा चौथ और आधुनिक जीवन
आज के समय में करवा चौथ केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं रहा, बल्कि एक सुंदर उत्सव बन गया है जिसमें पति-पत्नी दोनों एक-दूसरे के प्रति प्रेम, सम्मान और समर्पण जताते हैं। अब बहुत से पुरुष भी अपनी पत्नियों के साथ यह व्रत रखते हैं, ताकि समानता और प्यार दोनों बना रहे।
सोशल मीडिया पर भी करवा चौथ के अवसर पर तस्वीरें, संदेश और शुभकामनाएँ छाई रहती हैं। चाहे गाँव हो या शहर, महिलाएँ सोलह शृंगार में सजकर जब थालियाँ लेकर छत पर आती हैं, तो पूरा माहौल प्रेम और आस्था से भर जाता है।
🌼 100 साल बाद के इस करवा चौथ का ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार का योग “त्रिवेणी संयोग” कहलाएगा क्योंकि तीन शुभ योग एक साथ बन रहे हैं। यह संयोग 1925 के बाद पहली बार बन रहा है। इसका प्रभाव सिर्फ व्रती महिलाओं पर ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार पर पड़ेगा।
- धन लाभ: इस दिन व्रत करने से घर में सुख-समृद्धि आती है।
- आरोग्य लाभ: पति के स्वास्थ्य में सुधार और दीर्घायु का वरदान मिलता है।
- सौभाग्य वृद्धि: सुहागिन स्त्रियों का सौभाग्य अखंड और स्थायी होता है।
- परिवारिक एकता: रिश्तों में मधुरता और परिवार में एकता बनी रहती है।
🌙 करवा चौथ पर शुभ रंग और उपाय
- लाल रंग: यह रंग प्रेम, शक्ति और सौभाग्य का प्रतीक है। लाल साड़ी या चुनरी पहनना सबसे शुभ माना गया है।
- पीला रंग: यह सकारात्मकता और समृद्धि का प्रतीक है। पूजा के समय पीले वस्त्र पहनना शुभ है।
- मेहंदी लगाना: हाथों में मेहंदी लगाना न केवल सौंदर्य बढ़ाता है, बल्कि यह सुहाग की निशानी भी मानी जाती है।
उपाय:
- माता पार्वती को लाल चुनरी अर्पित करें।
- चाँद को अर्ग देते समय दूध और जल में चावल मिलाएँ।
- “ॐ सोम सोमाय नमः” मंत्र का 108 बार जप करें।
- गरीब महिला को श्रृंगार सामग्री दान करें, इससे व्रत का फल कई गुना बढ़ता है।
🌹 इस करवा चौथ को बनाएं यादगार
इस बार जब 100 साल बाद इतना शुभ संयोग बन रहा है, तो इसे खास बनाने के लिए कुछ खास कर सकते हैं—
- पति अपनी पत्नी को कोई खास तोहफा देकर इस दिन को यादगार बना सकते हैं।
- महिलाएँ भी अपने परिवार के लिए विशेष पकवान बनाकर शाम का समय और भी सुहावना बना सकती हैं।
- घर को दीपों और फूलों से सजाएँ ताकि माहौल में पवित्रता और सकारात्मकता बनी रहे।
❓ FAQs
Q1. 2025 में करवा चौथ कब है?
2025 में करवा चौथ 16 अक्टूबर (गुरुवार) को मनाया जाएगा।
Q2. इस बार का करवा चौथ खास क्यों है?
क्योंकि इस साल 100 साल बाद तीन शुभ योग — सिद्ध योग, रवि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग — एक साथ बन रहे हैं।
Q3. करवा चौथ व्रत का शुभ मुहूर्त क्या है?
पूजा का मुहूर्त शाम 05:46 बजे से रात 07:02 बजे तक रहेगा। चंद्रोदय का समय रात 08:26 बजे है।
Q4. करवा चौथ की पूजा में किन देवी-देवताओं की पूजा होती है?
इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश जी और कार्तिकेय की पूजा की जाती है।
Q5. क्या पुरुष भी करवा चौथ का व्रत रख सकते हैं?
हाँ, आजकल कई पुरुष भी अपनी पत्नी की लंबी उम्र और प्रेम के प्रतीक के रूप में यह व्रत रखते हैं।
Q6. करवा चौथ पर कौन से रंग के कपड़े पहनना शुभ होता है?
लाल, गुलाबी और पीले रंग के वस्त्र सबसे शुभ माने जाते हैं क्योंकि ये सौभाग्य और प्रेम का प्रतीक हैं।
Q7. क्या करवा चौथ के दिन बाल कटवाना या नेल कटिंग करना ठीक है?
नहीं, इस दिन ऐसे कार्य अशुभ माने जाते हैं। यह दिन पूरी तरह से शुद्धता और आस्था का होता है।
Q8. क्या करवा चौथ का व्रत बिना पानी पिए रखा जाता है?
हाँ, यह निर्जला व्रत होता है। महिलाएँ सूर्योदय से चंद्रोदय तक जल और भोजन ग्रहण नहीं करतीं।
Q9. क्या करवा चौथ की कथा सुनना जरूरी है?
हाँ, व्रत के पूर्ण फल के लिए करवा चौथ की कथा सुनना और पूजा विधि पूरी करना आवश्यक है।
Q10. 100 साल बाद के इस योग का क्या प्रभाव रहेगा?
इस योग का असर अत्यंत शुभ रहेगा। यह न केवल दांपत्य जीवन में सौहार्द बढ़ाएगा बल्कि स्वास्थ्य और समृद्धि भी लाएगा।
🙏 निष्कर्ष
करवा चौथ सिर्फ एक व्रत नहीं, बल्कि यह प्यार, आस्था और विश्वास का उत्सव है। 2025 का करवा चौथ इसलिए खास है क्योंकि यह 100 साल बाद बनने वाले त्रिवेणी संयोग के साथ आ रहा है। इस दिन व्रत रखने वाली हर महिला को यह संकल्प करना चाहिए कि वह अपने रिश्ते में प्रेम, विश्वास और सम्मान बनाए रखे।
इस शुभ दिन पर जब चाँद अपनी पूरी चमक से आकाश में नजर आएगा, तब व्रती स्त्रियों के चेहरे पर भी वही उजाला झलकेगा—आस्था का, प्रेम का और उम्मीद का।
शुभ करवा चौथ! यह पर्व आपके जीवन में खुशियाँ, सौभाग्य और अपार प्रेम लेकर आए।
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